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DBT और WIPO फेलोशिप को IIT दिल्ली और एम्स, नई दिल्ली; IITB और हिंदुजा तथा नानावती अस्पताल, मुंबई में स्थित डीबीटी बायो-डिज़ाइन केंद्रों में लागू किया जाएगा

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज युवाओं में मेड टेक स्टार्टअप और इनोवेटर्स को बढ़ावा देने के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) और विश्व बौद्धिक सम्पदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) समर्थित ग्लोबल हेल्थ इनोवेशन फेलोशिप के शुभारंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

उन्होंने बताया कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) और डब्ल्यूआईपीओ फेलोशिप को आईआईटी दिल्ली और एम्स, नई दिल्ली; आईआईटीबी और हिंदुजा तथा नानावती अस्पताल, मुंबई में स्थित डीबीटी बायो-डिज़ाइन केंद्रों में लागू किया जाएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जरूरतों और चुनौतियों के वैज्ञानिक समाधान खोजने के बारे में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के विजन के अनुसार, इस पहल से बौद्धिक संपदा और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस कदम से संस्थागत सहयोग भी बढ़ेगा और वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावशाली समाधान विकसित करने के बारे में युवा नवप्रवर्तकों को एक मूल्यवान मंच प्रदान करने में भी सहायता मिलेगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस पहल के तहत डब्ल्यूआईपीओ ने डीबीटी बायो-डिज़ाइन कार्यक्रम में भाग लेने के लिए चार डब्ल्यूआईपीओ समर्थित फेलोशिप में मदद करने के लिए डीबीटी के साथ एक औपचारिक सहयोग शुरू किया है। भागीदारों को निम्न और मध्यम आय वाले देशों सहित दुनिया भर के युवा पेशेवरों से 157 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अभी हाल में ही डीबीटी ने देश में 20 से अधिक चिकित्सा और तकनीकी संस्थानों को शामिल करके बायोडिजाइन कार्यक्रम को तैयार किया है। उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि विश्व बौद्धिक सम्पदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) ने वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों की पहल के तहत समर्थन देने के लिए इस कार्यक्रम को मान्यता दी है।

डीबीटी और डब्ल्यूआईपीओ के प्रयासों की सराहना करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह एक प्रमुख साझेदारी है और इसे नवाचार और स्टार्टअप प्रोत्साहन में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने में सक्षम बनाने के लिए मजबूत बनाया जाना चाहिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने रेखांकित किया कि जैव अर्थव्यवस्था प्रधानमंत्री के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के विजन में प्रभावी योगदान देने के लिए 150 बिलियन डॉलर के लक्ष्य को हासिल करने के मार्ग पर अग्रसर है। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार हर दिन तीन बायोटेक स्टार्ट-अप व्यवहार्य तकनीकी समाधान उपलब्ध कराने की आकांक्षाओं के साथ भारत में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की जैव अर्थव्यवस्था तेज विकास दर के साथ वर्ष 2025 में 10 मिलियन से अधिक रोजगारों का सृजन करने में मदद कर सकती है। ऐसा इस क्षेत्र में स्टार्टअप्स द्वारा संभव हुआ है जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूत बना रहे हैं और वैश्विक बाजारों में बायोटेक उत्पाद भी लॉन्च कर रहे हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज भारत में 4,000 बायोटेक स्टार्टअप हैं, जिनके वर्ष 2025 तक बढ़कर 10,000 होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग अपने सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम बीआईआरएसी के साथ मिलकर केंद्र/राज्य सरकार, शिक्षा जगत, उद्योग, स्टार्टअप, निवेशक, परोपकारी संगठन सहित सभी हितधारकों के सहयोग से भारतीय बायोटेक स्टार्ट-अप को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास का संचालन कर रहा है।

डब्ल्यूआईपीओ के महानिदेशक डेरेन टैंग ने कहा कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग ने दुनिया के सामने भारत की वैज्ञानिक क्षमता का प्रदर्शन किया है।

डेरेन टैंग ने भारत को एक वैश्विक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी केंद्र और दक्षिण-दक्षिण सहयोग का रोल मॉडल बनाने के लिए डब्ल्यूआईपीओ से हर संभव सहायता देने का वादा किया है। उन्होंने नवाचार के क्षेत्र में बायोटेक फेलो और स्टार्ट-अप तथा इनोवेशन के क्षेत्र में सार्थक सहयोग देने का भी वादा किया है।

डीबीटी-डब्ल्यूआईपीओ फ़ेलोशिप पहल का उल्लेख करते हुए डेरेन टैंग ने कहा, “आज हमारा ध्यान वैश्विक साझेदारी का उपयोग करते हुए स्थानीय स्वास्थ्य चुनौतियों को हल करने के लिए आईपी, नवाचार और चिकित्सा प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों के युवा पेशेवरों में सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।

भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले ने कहा कि यह साझेदारी हमें ग्लोबल साउथ-साउथ सहयोग को बढ़ावा देने सहित वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से सहयोगात्मक रूप से निपटने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में नवप्रवर्तकों की राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक संस्थागत क्षमताओं को सह-विकसित करने में सक्षम बनाएगी।

डीएसटी के सचिव प्रोफेसर अभय करंदीकर ने अपनी टिप्पणी में कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए भारत का एक सबसे पुराना संगठन है, जो स्टार्ट-अप द्वारा अनेक इनक्यूबेटर्स की मदद कर रहा है।

डीएसआईआर के सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी ने कहा कि डब्ल्यूआईपीओ को भारत की प्रौद्योगिकी को वैश्विक स्वीकार्यता दिलाने के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करना चाहिए।

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