केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज अत्याधुनिक नवीनतम राष्ट्रीय सर्वेक्षण नेटवर्क लॉन्च किया। राष्ट्रव्यापी “सतत संचालन संदर्भ स्टेशन” (सीओआरएस) नेटवर्क का संचालन भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारत में अब विश्वस्तरीय सटीक स्थान आधारित सेवा उपलब्ध है, जो वास्तविक समय में सेंटीमीटर स्तर की पोजिशनिंग सेवाएं प्रदान करने में सक्षम है।”
भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने पूरे भारत में 1,000 से अधिक सीओआरएस स्टेशन स्थापित किए हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अब हमारे पास भारतीय समाधानों के लिए भारतीय डेटा उपलब्ध है।
“सरकार ने ग्रामीण आबादी क्षेत्रों के मानचित्रण के लिए स्वामित्व परियोजना, मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के लिए पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, शहरी विकास के लिए स्मार्ट सिटी और अमृत परियोजना, लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सुधार के लिए भारतमाला और सागरमाला परियोजनाओं, राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजनाएं जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के लिए और कई अन्य बुनियादी ढांचागत एवं विकासात्मक परियोजनाएं जैसी कई विकास-केन्द्रित पहल शुरू की हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी परियोजनाओं के लिए उच्च-सटीकता मैपिंग और पोजिशनिंग डेटा की आवश्यकता है, भू-स्थानिक क्षेत्र का विनियमन और भू-स्थानिक डेटा के लोकतंत्रीकरण के परिणामस्वरूप विभिन्न उपयोगकर्ता समूहों की इन डेटासेट तक पहुंच आसान हो गई है।
भू-स्थानिक क्षेत्र के अलावा, सतत संचालन संदर्भ स्टेशन आधारित सटीक सेवाएं कृषि, खनन, निर्माण, परिवहन और नागर विमानन क्षेत्र में ऑटो नेविगेशन एवं मशीन नियंत्रित समाधान को भी बढ़ावा देंगी। इससे नवाचार और अनुसंधान के नए क्षेत्र खुलेंगे और इन क्षेत्रों में भू-स्थानिक आधारित इकोसिस्टम निर्मित होगा।
सीओआरएस डेटा विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों जैसे ऊपरी वायुमंडल और अंतरिक्ष मौसम अध्ययन, मौसम विज्ञान एवं मौसम संबंधी पूर्वानुमान, प्लेट मोशन और टेक्टोनिक अध्ययन, भूकंप विज्ञान और जल विज्ञान आदि में भी सहायता करेगा। राष्ट्रव्यापी सीओआरएस आधारित सेवाएं व्यवसाय और जनता के लिए उपलब्ध होंगी, जो न केवल विभिन्न हितधारकों द्वारा उत्पन्न भू-स्थानिक डेटा में उन्हें सामान्य संदर्भ प्रदान करके सुसंगतता सुनिश्चित करेगी, बल्कि उनकी उत्पादकता में भी वृद्धि करेगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व वाली सरकार की एक महत्वपूर्ण पहचान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन देना और नवाचार के लिए एक अनुकूल माहौल प्रदान करना है।
“2021 के भू-स्थानिक दिशानिर्देश और राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022 (एनजीपी 2022) ने उन्होंने कहा कि भारत में भू-स्थानिक क्षेत्र के परिवर्तन के लिए एक व्यापक योजना बनाई है। यह क्षेत्र बड़ी और युवा आबादी, निरंतर आर्थिक सुधारों और बढ़ते प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कारण भारत को एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनाने के सपने को साकार करने में देश की मदद करने में अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है। राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति के दो मुख्य लक्ष्य एक सुसंगत राष्ट्रीय ढांचा विकसित करना और व्यवसायों व आम लोगों के लिए सार्वजनिक धन का उपयोग करके एकत्र किए गए कीमती भू-स्थानिक डेटा की आसान उपलब्धता को सक्षम बनाना था।
इसके अलावा, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किए गए शासन संबंधी सुधारों ने पारदर्शिता, नागरिक-केंद्रित और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र को विकसित करने और हर किसी के जीवन को आसान बनाने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के लिए आवश्यक प्रयास किए गए हैं।
इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने ऑर्थो रेक्टिफाइड इमेज (ओआरआई) और डिजिटल एलिवेशन मॉडल (डीईएम) के लिए हितधारकों के सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने आईआईआईटी हैदराबाद और माइक्रोसॉफ्ट इंक के साथ साझेदारी में भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा आयोजित जियोस्पेशियल हैकथॉन के विजेताओं को भी सम्मानित किया।
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