भारतीय नौसेना के लिए परियोजना 1135.6 के अतिरिक्त अनुवर्ती जहाज के दूसरे युद्धपोत के निर्माण कार्य की आधारशिला औपचारिक रूप से दिनांक 18 जून 2021 को नौसेना उप प्रमुख वाइस एडमिरल जी अशोक कुमार, द्वारा रखी गई।
गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) में निर्माणाधीन जहाज भारतीय नौसेना के लिए दो उन्नत युद्धपोतों के निर्माण के लिए रूसी पक्ष के साथ अंतर सरकारी समझौते के तहत निष्पादित किए जा रहे स्वदेशी जहाज निर्माण कार्यक्रम का हिस्सा हैं। रक्षा मंत्रालय और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के बीच दिनांक 25 जनवरी 2019 को अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे। किसी भी जहाज के निर्माण की प्रक्रिया के औपचारिक प्रारंभ का प्रतीक जहाज़ की ‘कील लेईंग’ है जो एक प्रमुख गतिविधि है।पहले जहाज के लिए कील 29 जनवरी 2021 को रखी गई थी।पहले जहाज की आपूर्ति 2026 में और दूसरे जहाज़ की इसके 06 महीने बाद की जाएगी।
समारोह का आयोजन वर्चुअल रूप से वाइस एडमिरल किरण देशमुख, नियंत्रक युद्धपोत उत्पादन और अधिग्रहण (सीडब्ल्यूपी एंड ए), कोमोड़ोर संजय श्रीवास्तव, कोमोड़ोर (एसपी), कोमोड़ोर बी बी नागपाल (सेवानिवृत्त),जीएसएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, निदेशकों तथा भारतीय नौसेना और जीएसएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि वाइस एडमिरल जी अशोक कुमार ने कोविड की बाधाओं के बावजूद इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को हासिल करने में शिपयार्ड द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पहली बार इस तरह की तकनीकी जटिलता वाले इन जहाजों का निर्माण जीएसएल में स्वदेश में किया जा रहा है और यह आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल की दिशा में हमारी यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि महत्वपूर्ण स्वदेशी निर्माण सामग्री के उपयोग के अलावा बड़ी संख्या में प्रमुख उपकरणों को स्वदेशी समकक्ष के साथ प्रतिस्थापित किया जा रहा है।जहाजों के पूरे हल भी स्वदेशी स्टील से बनाए जा रहे हैं। उन्होंने शिपयार्ड की प्रमुख उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला और जीएसएल के कर्मचारियों द्वारा प्रदर्शित व्यावसायिकता की सराहना की।
अपने संबोधन के दौरान सीएमडी-जीएसएल ने इस जटिल जहाज निर्माण परियोजना को क्रियान्वित करने में शिपयार्ड के सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों पर प्रकाश डाला। चल रही महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद, शिपयार्ड ने कर्मचारियों के सक्रिय समर्थन और अभिनव समाधानों के साथ उत्पादन गतिविधियों को जारी रखा। उन्होंने भारतीय नौसेना को उनके निरंतर समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और स्वदेशी जहाज निर्माण के माध्यम से समुद्री रक्षा बलों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए जीएसएल की प्रतिबद्धता को दोहराया।
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