जरूरत की खबर- गर्मियों में बढ़ती एसिडिटी की समस्या:लाइफस्टाइल में करें ये 12 बदलाव, डॉक्टर से जानें एसिडिटी के 9 घरेलू इलाज

गर्मियों में डाइजेस्टिव सिस्टम स्लो होने से अपच और एसिडिटी की समस्या बढ़ जाती है। ज्यादातर लोग सीने में जलन, खट्टी डकार, पेट में भारीपन या गले में जलन सामान्य समझकर एसिडिटी के लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन समय रहते ध्यान न देने पर ये समस्या गंभीर रूप ले सकती है। साइंस जर्नल ‘नेचर’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, ज्यादा गर्मी, डिहाइड्रेशन और तापमान में बदलाव एसिड रिफ्लक्स के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। हालांकि खानपान और लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव व कुछ घरेलू उपायों से एसिडिटी…

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जरूरत की खबर- गर्मी में ओवरहीट हो सकते हैं गैजेट्स:ब्लास्ट का रिस्क, जानें डिवाइस को कैसे रखें कूल, फोन में ऑन करें ये सेटिंग

नौतपा में तापमान 45°C के आसपास पहुंच जाता है। इसका असर हमारे साथ–साथ हमारे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर भी पड़ता है। वो भी ओवरहीट हो सकते हैं। इस दौरान मोबाइल, लैपटॉप, ईयरबड्स या पावर बैंक जल्दी गर्म होते हैं। इससे बैटरी डैमेज, लो परफॉर्मेंस या अचानक डिवाइस बंद होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि- एक्सपर्ट: आशीष जायसवाल, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियर, NTPC सवाल- फोन में हीट कैसे बनती है? जवाब- आपने एनर्जी का एक प्रिंसिपल पढ़ा या सुना होगा, E = mc2. इसका…

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आपका पैसा- 25 हजार की सैलरी में कैसे बनें करोड़पति:फाइनेंशियल एक्सपर्ट से जानें बचत और निवेश के 9 नियम, न करें ये 13 गलतियां

भारत में ज्यादातर नौकरियों की शुरुआती सैलरी 20-25 हजार रुपए महीने होती है। अगर ये कहा जाए कि इस सैलरी में भी आप करोड़पति बन सकते हैं, तो शायद ये बात पढ़कर हैरानी हो, लेकिन ये मुमकिन है। कम सैलरी से कोई फर्क नहीं पड़ता है, फर्क इस बात से पड़ता है कि हम पैसे को कैसे मैनेज करते हैं। समय पर शुरुआत, सही प्लानिंग और डिसिप्लिन्ड निवेश से कम सैलरी में भी बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। आज ‘आपका पैसा’ कॉलम में जानेंगे कि 25,000 की सैलरी…

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मेंटल हेल्थ- सबको खुश रखती हूं, सबकी बात मानती हूं:दिल ‘ना’ कहना चाहता है, लेकिन मुंह से ‘हां’ निकलता है, ये आदत कैसे बदलूं?

सवाल– मैं 34 साल की शादीशुदा महिला हूं और स्कूल टीचर हूं। मेरी सबसे बड़ी समस्या यह है कि मैं किसी को ‘ना’ नहीं कह पाती। घर हो या ऑफिस, मैं हमेशा दूसरों की जरूरतों को अपनी जरूरतों से पहले रखती हूं। ऑफिस में सहकर्मी अक्सर अपना काम भी मुझसे करवा लेते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि मैं मना नहीं करूंगी। ससुराल वालों की भी हर बात मान लेती हूं। भले ही उससे मुझे मानसिक-शारीरिक थकान हो रही हो। मैं जानती हूं, लोग मुझे यूज करते हैं, लेकिन फिर…

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