एमनेस्टी इंटरनेशनल ने म्यामां की नेता आंग सान सू ची से अपना सर्वोच्च सम्मान ये कहते हुए वापस ले लिया कि सू ची अब इस सम्मान की हकदार नहीं हैं।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने म्यामां की सर्वोच्च नेता आंग सान सू ची से अपना सर्वोच्च सम्मान ‘एंबेसडर ऑफ़ कन्साइन्सस अवॉर्ड’ वापस ले लिया है। म्यामां की सर्वोच्च नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता सू ची को साल 2009 में इस सम्मान से नवाज़ा गया था, उस वक़्त सू ची अपने घर में नज़रबंद थीं।
मानवाधिकार के लिए काम करने वाली संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि रोहिंग्या अल्पसंख्यकों के मामले में उनकी चुप्पी बेहद निराश करने वाली रही है। एमनेस्टी इंटरनेशनल के सेक्रेटरी जनरल कुमी नाइडू ने म्यामां की नेता को एक ख़त लिखकर इस संबंध में जानकारी दी। इस बीच अमेरिका ने बांग्लादेश से रोहिंग्या शरणार्थियों की म्यामां में स्वैच्छिक और सम्मानजनक वापसी की मांग करते हुए कहा कि ढाका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें तमाम गतिविधियों की स्वतंत्रता हो और वे ‘‘शिविरों तक ही सीमित ना रहें।’’
बांग्लादेश और म्यामां के बीच पिछले महीने लाखों रोहिंग्या मुस्लिमों की मध्य नवम्बर में देश वापसी पर सहमति बनी थी। यह रोहिंग्या शरणार्थी म्यामां सेना के चलाए गए अभियान के बाद देश छोड़कर बांग्लादेश चले गए थे। समझौते के तहत पहले जत्थे में बांग्लादेश से 2,000 रोहिंग्या मुसलमान म्यांमा जाएंगे। इसके बाद दूसरा जत्था रवाना होगा।
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