पूर्व-सूचना के आधार पर, सीजीएसटी दिल्ली पश्चिम कमिश्नरी ने मैसर्स नियति स्टील्स के खिलाफ जांच शुरू की गई है। एक व्यक्ति करण कुमार अग्रवाल ने अपने स्वेच्छा से दिए गए बयानों में स्वीकार किया है कि वह उक्त फर्म के सभी दिन-प्रतिदिन के लेनदेन और संचालन का कार्य करता है। उक्त फर्म ने गैर-मौजूद संस्थाओं से 7.7 करोड़ रुपये का आईटीसी प्राप्त किया है।
आगे की जांच और विश्लेषणात्मक उपकरणों के प्रयोग के माध्यम से यह पाया गया कि करण कुमार अग्रवाल के साथ छह और फर्में जुड़ी हुई थीं। इन फर्मों के बल पर माल – रहित इनवॉयस के लगभग 292 करोड़ रुपये से अधिक के मूल्य के अपात्र/अस्वीकार्य इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का सामूहिक रूप से उपयोग करते हुए गैर-मौजूद संस्थाओं से 52 करोड़ रूपये का लाभ उठाया है। कर्ण कुमार अग्रवाल ने अपने स्वैच्छिक बयान में स्वीकार किया है कि उन्होंने इन सभी 6 फर्मों में प्रमाणीकरण के लिए अपने आधार कार्ड का उपयोग किया है और इनमें से कुछ फर्मों में माल प्राप्त किए बिना ही माल-रहित चालान जारी किए हैं और वह माल- रहित चालान के कर योग्य मूल्य के 3 से 4% के कमीशन के लिए चालान बिक्री में भी शामिल हैं।
अपात्र/अस्वीकार्य आईटीसी का लाभ उठाने में अपनी संलिप्तता के अपने स्वयं के प्रवेश और डेटा विश्लेषण द्वारा प्रमाणित होने को देखते हुए करण कुमार अग्रवाल को सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 132 जिसे उक्त अधिनियम की धारा 69 के साथ पढ़ा गया था, के अंतर्गत अपराधों के लिए गिरफ्तार किया गया और एलडी एसीएमएम कोर्ट द्वारा 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
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