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5 राज्यों में 1.07 लाख घरों के निर्माण के लिए परियोजना प्रस्तावों को हरी झंडी

आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने 23 दिसंबर 2021 को नई दिल्ली में आयोजित प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत केंद्रीय मंजूरी और निगरानी समिति (सीएसएमसी) की 57वीं बैठक की अध्यक्षता की। इसमें पीएमएवाई (यू) के विभिन्न कार्यक्षेत्रों के तहत आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पुडुचेरी और उत्तराखंड में 1.07 लाख घरों के निर्माण को लेकर परियोजना प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। एमओएचयूए के सचिव ने दूसरे राज्यों में पीएमएवाई (यू) के कार्यान्वयन की प्रगति की भी समीक्षा की।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए एमओएचयूए सचिव ने राज्यों व संघ शासित क्षेत्रों में घरों की बुनियादी स्थिति और निर्माण से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने राज्य व संघ शासित क्षेत्रों के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में घरों के निर्माण में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि नींव डालना राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए, इसके बाद भूखंडों पर घर बनाने को शत-प्रतिशत पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए। शहर दर शहर की मांग के हिसाब से राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को परिपूर्णता की घोषणा करनी चाहिए।

एमओएचयूए के सचिव ने एलएचपी राज्यों से भारतीय संदर्भ में आगे के प्रतिरूप के लिए एलएचपी तकनीकों को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया। उन्होंने राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे छात्रों, पेशेवरों और अन्य हितधारकों को टेक्नोग्राही (तकनीकीग्राही) के रूप में भर्ती कर उत्साहित करें ताकि अधिक से अधिक लोग इन तकनीकों का उपयोग करना सीखें। उन्होंने सभी राज्यों व संघ शासित क्षेत्रों से एलएचपी साइटों का दौरा करने और इसके बारे में अध्ययन करने का अनुरोध किया। टेक्नोग्राही मापदंड के हिसाब से इंजीनियर्स और शहरी योजनाकारों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।

मिशन के तहत स्वीकृत घरों की कुल संख्या अब 1.14 करोड़ है। इनमें से लगभग 91 लाख का जमीन पर निर्माण चल रहा है। 53 लाख से अधिक घरों को पूरा कर लाभार्थियों को वितरित किया जा चुका है। मिशन के तहत कुल निवेश 7.52 लाख करोड़ रूपये है, जिसमें 1.85 लाख करोड़ रूपये की केंद्रीय सहायता है। अब तक 1.14 लाख करोड़ की केंद्रीय सहायता पहले ही जारी की जा चुकी है।

सीएसएमसी की बैठक में नागालैंड के दीमापुर और जम्मू के कोट भलवाल में डिमॉन्स्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स (डीएचपी) के निर्माण को भी मंजूरी दी गई। दोनों परियोजनाओं को पीएमएवाई (यू) के प्रौद्योगिकी उप मिशन घटक के तहत नई/वैकल्पिक तकनीकों का उपयोग करके बनाया जाएगा। डीएचपी ऐसा आदर्श हाउसिंग प्रोजेक्ट है जो जमीनी स्तर पर प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग को प्रदर्शित करने और साइट पर ओरिएंटेशन देने के लिए एक मंच के रूप में भी उपयोग किया जाता है साथ ही आवास क्षेत्र में पेशेवरों और छात्रों को प्रशिक्षण देता है। अब तक छह डीएचपी पूरे हो चुके हैं और देश के विभिन्न हिस्सों में चार का निर्माण किया जा रहा है।

दीमापुर में बनने वाले डीएचपी का उपयोग कामकाजी महिला छात्रावास के रूप में किया जाएगा जबकि कोट भवन अन्य बुनियादी सुविधाओं और प्रावधानों के साथ किराये के आधार पर एक खेल छात्रावास के रूप में कार्य करेगा।

सीएसएमसी ने आईआईटी खड़गपुर द्वारा प्रस्तुत कम लागत वाली बांस आवास परियोजना के लिए आशा भारत के तहत ऊष्मायन सहयोग के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी।

इस अवसर पर एमओएचयूए के सचिव ने स्वदेशी अभिनव निर्माण सामग्री

आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने 23 दिसंबर 2021 को नई दिल्ली में आयोजित प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत केंद्रीय मंजूरी और निगरानी समिति (सीएसएमसी) की 57वीं बैठक की अध्यक्षता की। इसमें पीएमएवाई (यू) के विभिन्न कार्यक्षेत्रों के तहत आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पुडुचेरी और उत्तराखंड में 1.07 लाख घरों के निर्माण को लेकर परियोजना प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। एमओएचयूए के सचिव ने दूसरे राज्यों में पीएमएवाई (यू) के कार्यान्वयन की प्रगति की भी समीक्षा की।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए एमओएचयूए सचिव ने राज्यों व संघ शासित क्षेत्रों में घरों की बुनियादी स्थिति और निर्माण से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने राज्य व संघ शासित क्षेत्रों के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में घरों के निर्माण में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि नींव डालना राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए, इसके बाद भूखंडों पर घर बनाने को शत-प्रतिशत पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए। शहर दर शहर की मांग के हिसाब से राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को परिपूर्णता की घोषणा करनी चाहिए।

एमओएचयूए के सचिव ने एलएचपी राज्यों से भारतीय संदर्भ में आगे के प्रतिरूप के लिए एलएचपी तकनीकों को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया। उन्होंने राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे छात्रों, पेशेवरों और अन्य हितधारकों को टेक्नोग्राही (तकनीकीग्राही) के रूप में भर्ती कर उत्साहित करें ताकि अधिक से अधिक लोग इन तकनीकों का उपयोग करना सीखें। उन्होंने सभी राज्यों व संघ शासित क्षेत्रों से एलएचपी साइटों का दौरा करने और इसके बारे में अध्ययन करने का अनुरोध किया। टेक्नोग्राही मापदंड के हिसाब से इंजीनियर्स और शहरी योजनाकारों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।

मिशन के तहत स्वीकृत घरों की कुल संख्या अब 1.14 करोड़ है। इनमें से लगभग 91 लाख का जमीन पर निर्माण चल रहा है। 53 लाख से अधिक घरों को पूरा कर लाभार्थियों को वितरित किया जा चुका है। मिशन के तहत कुल निवेश 7.52 लाख करोड़ रूपये है, जिसमें 1.85 लाख करोड़ रूपये की केंद्रीय सहायता है। अब तक 1.14 लाख करोड़ की केंद्रीय सहायता पहले ही जारी की जा चुकी है।

सीएसएमसी की बैठक में नागालैंड के दीमापुर और जम्मू के कोट भलवाल में डिमॉन्स्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स (डीएचपी) के निर्माण को भी मंजूरी दी गई। दोनों परियोजनाओं को पीएमएवाई (यू) के प्रौद्योगिकी उप मिशन घटक के तहत नई/वैकल्पिक तकनीकों का उपयोग करके बनाया जाएगा। डीएचपी ऐसा आदर्श हाउसिंग प्रोजेक्ट है जो जमीनी स्तर पर प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग को प्रदर्शित करने और साइट पर ओरिएंटेशन देने के लिए एक मंच के रूप में भी उपयोग किया जाता है साथ ही आवास क्षेत्र में पेशेवरों और छात्रों को प्रशिक्षण देता है। अब तक छह डीएचपी पूरे हो चुके हैं और देश के विभिन्न हिस्सों में चार का निर्माण किया जा रहा है।

दीमापुर में बनने वाले डीएचपी का उपयोग कामकाजी महिला छात्रावास के रूप में किया जाएगा जबकि कोट भवन अन्य बुनियादी सुविधाओं और प्रावधानों के साथ किराये के आधार पर एक खेल छात्रावास के रूप में कार्य करेगा।

सीएसएमसी ने आईआईटी खड़गपुर द्वारा प्रस्तुत कम लागत वाली बांस आवास परियोजना के लिए आशा भारत के तहत ऊष्मायन सहयोग के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी।

इस अवसर पर एमओएचयूए के सचिव ने स्वदेशी अभिनव निर्माण सामग्री और निर्माण तकनीकों पर एक संग्रह का भी विमोचन किया। यह 5 से 7 अक्टूबर 2021 तक लखनऊ में आयोजित भारतीय आवास प्रौद्योगिकी मेला (आईएचटीएम) के दौरान प्रदर्शित 84 प्रौद्योगिकियों के बारे में विवरण प्रदान करता है। यह देश भर में क्षेत्र स्तर के अनुप्रयोग, प्रतिकृति के लिए प्रौद्योगिकियों के प्रसार के लिए उपयोगी संसाधन के रूप में कार्य करेगा। यह संग्रह नीति निर्माताओं, सार्वजनिक/निजी निर्माण एजेंसियों अन्य हितधारकों को भविष्य की आवास परियोजनाओं में सामग्री व तकनीकी को चुनने और अपनाने में मदद करेगा।

संग्रह को जारी करते हुए एमओएचयूए के सचिव ने राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को आवास क्षेत्र में बेहतरी को लेकर निर्माण के लिए इन तकनीकों का उपयोग करने के लिए निर्माण एजेंसियों, इंजीनियरों, वास्तुकारों के साथ इसे व्यापक रूप से साझा करने के लिए कहा।

एमओएचयूए के सचिव ने चेन्नई (तमिलनाडु), इंदौर (मध्य प्रदेश), राजकोट (गुजरात), रांची (झारखंड), अगरतला (त्रिपुरा) और लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में लाइट हाउस परियोजनाओं (एलएचपी) की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूरा करने को लेकर निर्देश दिए।

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