“स्पेशियलटी स्टील के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना” के बारे में चर्चा के लिए आज नई दिल्ली में इस्पात मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय इस्पात मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह ने की। केंद्रीय राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, संसद सदस्य और इस्पात मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया। बैठक के दौरान संसद सदस्यों को 22 जुलाई, 2021 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित और 29 जुलाई, 2021 को अधिसूचित उत्पादन से सम्बद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की विशेषताओं के बारे में जानकारी दी गई।
बैठक में बताया गया कि महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित कर मूल्य वर्धित इस्पात के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य से पीएलआई योजना को अनुमोदित किया गया था। प्रोत्साहन 2023-24 से देय होगा और यह पांच उत्पाद श्रेणियों, जैसे कोटेड / प्लेटेड इस्पात उत्पाद, उच्च शक्ति / पहनने के लिए प्रतिरोधी स्टील, विशेष पटरियां, मिश्र धातु इस्पात उत्पाद तथा इस्पात के तार और विद्युत इस्पात के लिए लागू होगा। उचित परामर्श के बाद उत्पाद श्रेणियों का चयन किया गया था। इस योजना के लिए बजटीय परिव्यय 6,322 करोड़ रुपये रखा गया है।
भारत में पंजीकृत वे कंपनियां, जो देश के भीतर पिघले और ढलवां इस्पात का उपयोग करके पहचान की गई उत्पाद श्रेणियों के विनिर्माण में लगी हुई हैं,उन्हें इस योजना में भाग लेने के लिए पात्र माना जाएगा। कंपनियों का चयन वृद्धिशील उत्पादन और निवेश सीमा दोनों को समान महत्व देते हुए एक पारदर्शी चयन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि इस्पात क्षेत्र में कुछ उत्पाद श्रेणियों में निवेश की लंबी अवधि को ध्यान में रखते हुए योजना में प्रारंभिक वर्ष के स्थगन और फ्रंट-लोडेड निवेश को प्राथमिकता दी गई है। किसी भी वर्ष के दौरान देय बजटीय परिव्यय और पीएलआई प्रोत्साहन के साथ-साथ समग्र परिव्यय को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है। इसके अनुसार, योजना में भाग लेने वाली प्रत्येक कंपनी/संयुक्त उद्यम के लिए देय पीएलआई पर एक सीमा निर्धारित की गई है। इस योजना के माध्यम से, सरकार को लगभग 5.25 लाख रोजगार सृजित करने के साथ-साथ लगभग 40,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की उम्मीद है। इसके अलावा, यह अनुमान है कि अगले कुछ वर्षों में विशेष इस्पात का आयात कम से कम हो जाएगा।
पीएलआई योजना का समर्थन करते हुए सांसदों ने योजना के संबंध में अपने सुझाव दिए। इस्पात मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह ने इस योजना का समर्थन करने और अपने मूल्यवान सुझाव प्रदान करने के लिए सांसदों को धन्यवाद दिया और कहा कि माननीय प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण में योगदान देने वाली योजना सभी के लिए एक फायदेमंद योजना है। उन्होंने आगे बताया कि मंत्रालय अपनी परियोजना प्रबंधन एजेंसी के माध्यम से विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है।
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