संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक बैठक आयोजित कर प्रस्ताव पारित किया जिसमें कहा गया है कि तालिबान से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अफगान तथा विदेशी नागरिकों को सुरक्षित देश छोडने की अनुमति देगा।
विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने न्यूयॉर्क में 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। प्रस्ताव पारित होने के बाद हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश को धमकाने या उसपर हमला करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवादियों को पनाह देने या उन्हें प्रशिक्षित करने अथवा आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने के लिए भी अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। विदेश सचिव ने कहा कि संयुक्त सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 1267 भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
इस प्रस्ताव में इस बात को भी शामिल किया गया है कि तालिबान अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य एजेंसियों को मानवीय सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से उन्हें देश में सुरक्षित और निर्बाधित आवाजाही की अनुमति देगा।
यह प्रस्ताव अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस की ओर से लाया गया था। यह प्रस्ताव परिषद के 13 सदस्यों के समर्थन से पारित किया गया, जबकि एक सदस्य देश ने इसका विरोध किया। रूस और चीन ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।
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