सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2000 के लाल किला हमला मामले में लश्करे तैयबा के आतंकवादी मोहम्मद आरिफ की मौत की सजा को बरकरार रखा है। इस घटना में सेना के दो अधिकारियों सहित तीन लोग मारे गए थे।
मुख्य न्यायाधीश यू यू ललित और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी ने मोहम्मद आरिफ की पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए कहा कि न्यायालय ने इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पर विचार नहीं करने के अनुरोध को स्वीकार किया है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले को देखते हुए आरिफ का अपराध सिद्ध होता है, इसलिए पुनर्विचार समीक्षा याचिका खारिज की गई है।
वर्ष 2000 में 22 दिसंबर को कुछ घुसपैठियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की और 7वीं राजपुताना राइफल्स के दो जवानों सहित तीन लोगों को मार गिराया।
पाकिस्तानी नागरिक मोहम्मद आरिफ को इस घटना के तीन दिन बाद गिरफ्तार किया गया था और निचली अदालत ने उसे मौत की सजा सुनाई थी। बाद में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने उसकी मौत की सजा को बरकरार रखा।
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