सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी मामले की विशेष जांच दल-एस आई टी द्वारा चल रही जांच की निगरानी के लिए राज्य सरकार द्वारा घटित न्यायिक आयोग पर उसे भरोसा नहीं है। यह मामला कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों को एक वाहन से कुचले जाने का है। यह वाहन केन्द्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा का था।
उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच की निगरानी के लिए एक सदस्यीय आयोग गठित किया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रदीप कुमार श्रीवास्तव इसकी निगरानी करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन.वी. रामन्ना और न्यायमूर्ति सूर्यकांत तथा हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि जांच आयोग में अन्य राज्य के उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने आयोग में पंजाब उच्च न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश राकेश कुमार जैन या हरियाणा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत सिंह की नियुक्ति का सुझाव दिया। उच्चतम न्यायालय ने आज सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में तीन एफ.आई.आर दर्ज की गई हैं। ये किसानों की मौत, बदले की कार्रवाई में राजनीतिक नेताओं की मौत और एक पत्रकार की मृत्यु से संबंधित हैं। न्यायालय ने कहा कि तीनों एफ.आई.आर की जांच स्वतंत्र रूप से होनी चाहिए और एक मामले के सबूतों का उपयोग दूसरी घटना के आरोपियों को बचाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
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