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सीएससी नेटवर्क के माध्यम से जुड़े देश भर के 1.5 लाख से अधिक किसानों ने जागरुकता कार्यक्रम में भाग लिया

पशुपालन और डेयरी विभाग ने आजादी का अमृत महोत्सव के भाग के रूप में, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) नेटवर्क के माध्यम से पशुजन्य रोग पर एक जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया। सीएससी नेटवर्क के माध्यम से जुड़े देश भर के 1.5 लाख से अधिक किसानों ने जागरुकता कार्यक्रम में भाग लिया।

पशुपालन और डेयरी विभाग की सचिव अलका उपाध्याय ने इस अवसर पर किसानों को संबोधित किया और पशुजन्य बीमारी से जुड़े जोखिमों और पशुधन क्षेत्र और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभाग राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनएडीसीपी) लागू कर रहा है, जो दो प्रमुख प्रचलित पशुजन्य रोग के नियंत्रण के लिए सितंबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई एक प्रमुख योजना है। एफएमडी के लिए 100 प्रतिशत भैंस, भेड़, बकरी और सुअर और 4-8 महीने की 100 फीसदी गोजातीय बछड़ी को खुरपका और मुंहपका रोग और ब्रुसेलोसिस का टीका लगा रहा है। विभाग एंथ्रेक्स और रेबीज जैसी पशुजन्य बीमारियों के खिलाफ टीकाकरण और ‘आकस्मिक और विदेशी बीमारियों के नियंत्रण’ के लिए राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की सहायता भी कर रहा है। सामाजिक आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए, विभाग रोग निदान, उपचार, छोटी सर्जरी और बीमार जानवरों की देखभाल और प्रबंधन आदि में जागरुकता के लिए मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों (एमवीयूएस) के माध्यम से किसानों के दरवाजे पर पशु चिकित्सा सेवा प्रदान कर रहा है।

पशुपालन और डेयरी सचिव ने दोहराया कि पशुपालन और डेयरी विभाग किसानों के घरों पर गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करने और पशु रोगों के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए बेहतर पशु चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता/पहुंच बढ़ाने की खातिर सभी हितधारकों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने वर्तमान परिदृश्य में जूनोसिस(पशुजन्य) रोगों से जुड़े जोखिम को नियंत्रित करने में ‘वन हेल्थ’ अवधारणा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने पशुजन्य बीमारी, टीकाकरण कार्यक्रम और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण बीमारियों और अन्य आकस्मिक और विदेशी बीमारियों के उन्मूलन और नियंत्रण के लिए विभाग द्वारा कार्यान्वित की जा रही योजनाओं के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी। विभाग के अधिकारियों द्वारा प्रस्तुतीकरण के माध्यम से उपस्थित लोगों को ‘ज़ूनोसिस के जोखिम और रोकथाम’ और ‘रेबीज की रोकथाम और नियंत्रण’ के बारे में पूरी जानकारी दी गई।

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