वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था कई देशों के साथ-साथ विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में निश्चित रूप से बेहतर स्थिति में है। राज्यसभा में देश में आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर चर्चा का जवाब देते हुए, निर्मला सीतारामन ने कहा कि देश के वृहद आर्थिक मूल तत्व मजबूत हैं।
वित्तमंत्री ने कहा कि महंगाई की दर अभी सात प्रतिशत है। सरकार तथा भारतीय रिजर्व बैंक मिलकर इसे नियंत्रित करने और इसे छह प्रतिशत से नीचे रखने के लिए कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्राहकों द्वारा बैंकों से नकद निकासी या चेक बुक पर कोई जीएसटी नहीं है, उन्होंने कहा कि जब चेक बुक को प्रिंटर से खरीदा जाता है तो उस पर जीएसटी लगाया जाता है। जीएसटी वृद्धि पर अस्पताल के बिस्तर या आईसीयू पर कोई जीएसटी नहीं है लेकिन यह अस्पताल के कमरे पर प्रतिदिन पांच हजार रुपये से अधिक लगाया गया है।
इससे पहले, चर्चा की शुरूआत करते हुए, भारतीय जनता पार्टी के प्रकाश जावड़ेकर ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा किए गए कई उपायों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी तथा रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण आपूर्ति में व्यवधान पैदा हुआ जिसके परिणामस्वरूप दुनियाभर में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौरान अस्सी करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया है और गरीब महिलाओं को नौ करोड़ से अधिक उज्ज्वला कनेक्शन दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त उर्वरक सब्सिडी प्रदान की गई।
उन्होंने आम आदमी को राहत देने के लिए केंद्र और भाजपा शासित राज्यों द्वारा किए गए पेट्रोलियम उत्पादों पर करों को कम नहीं करने के लिए विपक्षी शासित राज्यों पर निशाना साधा। उन्होंने विपक्ष पर जीएसटी वृद्धि के मुद्दे पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया क्योंकि उन्होंने जीएसटी परिषद में सर्वसम्मति से निर्णय लिया था जबकि अब वे इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछली यूपीए सरकार के दौरान खाद्य महंगाई दहाई अंक में थी, जबकि नरेन्द्र मोदी सरकार ने अपने शासनकाल में इसे 5 से 7 प्रतिशत के दायरे में रखा है।
वाईएसआरसीपी के वी० विजयसाई रेड्डी ने कहा कि महंगाई पर काबू पाने के लिए कदम उठाना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने सरकार से पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना जैसी छोटी बचत योजना पर ब्याज दर बढ़ाने की भी मांग की।
बीजू जनता दल के सुजीत कुमार ने कहा कि कीमतों में वृद्धि और महंगाई का असर मध्यम वर्ग और गरीबों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। उन्होंने जीएसटी वृद्धि का मुद्दा उठाया और सरकार से आम आदमी पर लगाए गए कर के बोझ को वापस लेने का आग्रह किया।
राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा ने आम आदमी से संबंधित वस्तुओं पर जीएसटी दरों में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की।
झारखंड मुक्ति मौर्चा की महुआ माजी ने महंगाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि खाने-पीने की चीजों पर ऊंची दरों का असर आम आदमी पर पड़ेगा।
असम गण परिषद के बीरेंद्र प्रसाद वैश्य ने सरकार से आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी वृद्धि पर पुनर्विचार करने और वापस लेने की मांग की।
चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के डॉक्टर सुधांशु त्रिवेदी ने देश में उच्च मुद्रास्फीति के विपक्ष के आरोपों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि देश में मुद्रास्फीति की दर 7 प्रतिशत है जबकि करीब 63 देशों में यह दर 10 प्रतिशत से ज्यादा है जबकि कुछ अन्य देशों में यह 50 प्रतिशत और शत-प्रतिशत है।
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