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सत्ता में आने के बाद एक्शन में गुजरात की पटेल सरकार

गुजरात की राजनीति में पिछले कुछ दिनों में कई नाटकीय मोड़ देखने को मिले। पहले विजय रूपाणी ने इस्तीफ़ा दिया और उसके बाद मुख्यमंत्री पद के लिए कई नामों की सुगबुगाहट होने लगी। अंतत: सब नामों पर विराम लगाते हुए बीजेपी आलाकमान ने गुजरात की सत्ता भूपेंद्र पटेल को सौंपी जिन्होंने 13 सितम्बर, 2021 को राज्य के 17वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। भूपेंद्र रजनीकांत पटेल के नाम पर कईयों को आश्चर्य हुआ क्योंकि जिन नामों के कसीदे गढ़े जा रहे थे उन्हें पीछे छोड़कर अहमदाबाद की घाटलोदिया सीट के विधायक भूपेंद्र पटेल ने अपना झंडा गाड़ दिया।

भूपेंद्र पटेल 1999-2001 के बीच पटेल अहमदाबाद नगरपालिका की स्टैंडिंग कमेट के अध्यक्ष रहे, जबकि 2008-10 के बीच वे अहमदाबाद नगरपालिका स्कूल बोर्ड के उपाध्यक्ष रहे। 2010 से 2015 के दौरान वे अहमदाबाद के ही थालतेज वार्ड से पार्षद भी रह चुके हैं। भूपेंद्र पटेल ने 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के शशिकांत पटेल को हराया था।

सत्ता में आने के तुरंत बाद ही भूपेंद्र पटेल एक्शन में नज़र आ रहे हैं। जिस समय वो मुख्यमंत्री बने उस समय गुजरात बाढ़ की मार झेल रहा है। ऐसे में उन्होंने बिना देर किए इस स्थिति से निपटने के लिए अहम निर्णय किए। उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों, राजकोट और जामनगर का दौरा किया। पीड़ित लोगों से मुलाक़ात की और प्रशासनिक अधिकारियों से नागरिकों की हर संभव मदद करने को कहा। राज्य सरकार ने हाल ही में बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए सहायता राशि में वृद्धि की है। घरेलू सामान की सहायता राशि 3200 से बढ़ाकर 7000 रुपए प्रति परिवार की जाएगी। आंशिक नुकसान और पक्के मकानों की मरम्मत के लिए 15000 रुपए दिए जाएंगे। पशुपालकों को मवेशियों की मृत्यु पर 50000 रुपए की सहायता मिलेगी।

बारिश के कारण गुजरात का जीवन अस्त-व्यस्त नज़र आ रहा है जिसे संभालने की पूरी कोशिश जारी है। गुजरात सरकार द्वारा बारिश और अन्य कारणों के खस्ताहाल सड़कों के लिए भी अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए गुजरात के सड़क एवं भवन निर्माण मंत्री पूर्णेश मोदी ने 9978403669 व्हाट्सनंबर जारी किया है जिसपर कोई भी नागरिक अपने इलाकों की खराब सड़कों की जानकारी दे सकता है। सड़क पर गड्ढों की मरम्मत के लिए गुजरात सरकार 1-10 अक्टूबर तक ‘सड़क मरम्मत महा अभियान’ चलाएगी। बीते बुधवार को अपनी पहली कैबिनेट मीटिंग में नए मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों और अधिकारियों को यह निर्देश दिया है कि वो हर सोमवार और मंगलवार को अपने-अपने दफ्तर में आम लोगों से मिलने के लिए उपस्थित रहें ताकि जनता की समस्याओं का निवारण किया जाए। कई बार सरकारी कामों के लिए दूरदराज के गांवों और दुर्गम इलाकों से लोग आते हैं लेकिन उनकी शिकायतें अनसुनी कर दी जाती हैं, ऐसे में हफ्ते के दो दिन उनके लिए आवंटित किए जाने से प्रशासन को प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।

गुजरात की नई सरकार में नो रिपीट थ्योरी के आधार पर सभी नए मंत्रियों को जगह दी गई है। एक और नया प्रयोग करते हुए इस बार गुजरात सरकार ने केवल 2 प्रवक्ताओं को नियुक्त किया है। यानि केवल राजेंद्र त्रिवेदी और जीतू वाघणी ही गुजरात सरकार सरकार की तरफ़ से मीडिया से रूबरू होंगे। कोई भी अन्य मंत्री सरकार की कोई भी बात प्रेस के सामने नहीं कर सकता।

भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने ‘ग्रीन कॉरिडोर फैसिलिटी’ और ‘आपके द्वार आयुष्मान’ अभियान की की शुरुआत की है। यह अभियान 15 अक्टूबर तक चलेगा जिसके तहत गुजरात के 80 लाख परिवारों को PMJAY योजना के तहत लाभान्वित किया जाएगा। गुजरात के महेसाणा जिले में 8 मंजिला नए सिविल अस्पताल का निर्माण करवाया जाएगा जिसके लिए सरकार द्वारा 85 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र की बात करें तो गुजरात में कोरोना की कुछ नए मामले सामने आए हैं जो प्रशासन के लिए एक और चुनौती है। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्री के शब्दों में सभी काम महामारी की तीसरी लहर की आशंका को ध्यान में रखकर ही किए जाए रहे हैं और स्थिति को संभालने के लिए हर रोज़ औसतन 75000 से अधिक कोरोना टेस्ट भी हो रहे हैं। बीते वीरवार तक राज्य में तकरीबन 5.83 करोड़ से अधिक कोरोना वैक्सीनेशन दिए जा चुके हैं। कोरोना प्रोटोकॉल के कारण मार्च 2020 के बाद कोरोना महामारी के कारण गांधीनगर सचिवालय में विज़िटर्स के आने पर रोक लगाई गई थी। लेकिन सीएम पटेल ने कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए और विज़िटर पास के साथ सचिवालय में प्रवेश को फिर से मंज़ूरी दे दी।

गुजरात में शिक्षा के विकास को गति देने के लिए शिक्षा मंत्रालय द्वारा शैक्षणिक योजना के लिए 23 करोड़ 77 लाख रुपए का अनुदान आवंटित किया गया है। लेकिन इन तमाम फ़ैसलों के अतिरिक्त अपनी सत्ता के पहले ही हफ्ते में गुजरात सरकार को दो बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जिसमें पहला है फोर्ड मोटर्स द्वारा साणंद संयंत्र को बंद करने का फ़ैसला और दूसरा कच्छ और पोरबंदर तटों पर भारी मात्रा में हेरोइन ड्रग्स का पकड़े जाना। गुजरात विधानसभा में 27-29 सितंबर तक नए मंत्रिमंडल को मानसून सत्र में पहली परीक्षा देनी होगी। गुजरात की फिलहाल की चुनौतियों को देखते हुए विपक्ष करारा प्रहार कर सकता है जिसके लिए पटेल सरकार को उचित जवाब के साथ अपनी बात रखनी होगी। क्योंकि गुजरात में अगले साल चुनाव आने वाला हैं इसलिए सीएम पटेल और उनके 24 सदस्यों की नई कैबिनेट को समस्याओं की इस बाढ़ से अपनी नैया पार लगाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।

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