संसदीय समिति ने जेल में बंद गर्भवती महिलाओं की विशेष स्वास्थ्य देखरेख किये जाने की सिफारिश की है। ये सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश के अनुरूप है जिसमें कहा गया है कि जेल में महिला कैदियों के लिए प्रसव पूर्व और प्रसव बाद की देखरेख तथा उनके बच्चों को उपयुक्त सुविधाएं दी जानी चाहिए। समिति के अध्यक्ष बृजलाल ने आज संसद में अपनी रिपोर्ट सौंपी। समिति ने कहा है कि गर्भवती महिला कैदियों की जांच जिला सरकारी अस्पतालों में कराई जानी चाहिए। चिकित्सा परामर्श के अनुसार उन्हें उपयुक्त प्रसव पूर्व और प्रसव बाद की देखरेख दी जानी चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि जेल में बंद गर्भवती महिलाओं को जेल के बाहर प्रसव कराने की सुविधा मिलनी चाहिए। बच्चों को भोजन, टीकाकरण, शिक्षा जैसी पर्याप्त देखरेख भी दी जानी चाहिए।
समिति ने सिफारिश की है कि जेल में जन्म लेने वाले शिशुओं को 12 साल की उम्र तक अपनी मां के रहने की अनुमति मिलनी चाहिए।
भारत बनाम इंग्लैंड दूसरा वनडे: जो रूट की नाबाद 99 रन की पारी से इंग्लैंड… Read More
ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम की बड़ी चुनौती, नए सीजन में जीत की लय बरकरार रखने पर… Read More
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना को बड़ी सौगात, 12 राज्यों को ₹10,021 करोड़ जारी नई दिल्ली:… Read More
बांग्लादेश बनाम जिम्बाब्वे: दूसरे टी20 में सीरीज बचाने उतरेगा बांग्लादेश, जिम्बाब्वे की नजर सीरीज जीत… Read More
पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए मूल्य स्थिरीकरण कोष के इस्तेमाल की मांग… Read More
दिल्ली MCD वार्ड समिति चुनाव में BJP का शानदार प्रदर्शन, कई जोन में AAP को… Read More
This website uses cookies.
Leave a Comment