संसदीय समिति ने जेल में बंद गर्भवती महिलाओं की विशेष स्वास्थ्य देखरेख किये जाने की सिफारिश की है। ये सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश के अनुरूप है जिसमें कहा गया है कि जेल में महिला कैदियों के लिए प्रसव पूर्व और प्रसव बाद की देखरेख तथा उनके बच्चों को उपयुक्त सुविधाएं दी जानी चाहिए। समिति के अध्यक्ष बृजलाल ने आज संसद में अपनी रिपोर्ट सौंपी। समिति ने कहा है कि गर्भवती महिला कैदियों की जांच जिला सरकारी अस्पतालों में कराई जानी चाहिए। चिकित्सा परामर्श के अनुसार उन्हें उपयुक्त प्रसव पूर्व और प्रसव बाद की देखरेख दी जानी चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि जेल में बंद गर्भवती महिलाओं को जेल के बाहर प्रसव कराने की सुविधा मिलनी चाहिए। बच्चों को भोजन, टीकाकरण, शिक्षा जैसी पर्याप्त देखरेख भी दी जानी चाहिए।
समिति ने सिफारिश की है कि जेल में जन्म लेने वाले शिशुओं को 12 साल की उम्र तक अपनी मां के रहने की अनुमति मिलनी चाहिए।
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