श्रीलंका की नकदी संकट से जूझ रही सरकार ने बड़ी कंपनियों पर 2.5 प्रतिशत सामाजिक योगदान कर लगाने सहित कई उपायों को मंजूरी दी है।
सरकार ने आर्थिक सुधार को सुगम बनाने और ऊर्जा एवं खाद्य संकट को कम करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकांश कर्मचारियों के लिए शुक्रवार को अवकाश घोषित किया है।
श्रीलंका 1948 में ब्रिटेन से आजादी के बाद से सबसे भीषण आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।
आर्थिक संकट के कारण भोजन, दवा, रसोई गैस और अन्य ईंधन, टॉयलेट पेपर और यहां तक कि माचिस जैसी आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी पैदा हो गई है।
श्रीलंकाई लोगों को ईंधन और रसोई गैस खरीदने के लिए दुकानों के बाहर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
श्रीलंका सरकार के मंत्रिमंडल की सोमवार को हुई बैठक में 12 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार वाली कंपनियों पर 2.5 प्रतिशत कर लगाने के विधेयक को मंजूरी दी गई।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘सामाजिक योगदान उपकर’ नाम का नया कर आयात, विनिर्माण, सेवा प्रदाताओं, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं के व्यवसायों पर लागू होगा।
मंत्रिमंडल ने मौजूदा ऊर्जा संकट को कम करने के उद्देश्य से एक अन्य उपाय में सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए शुक्रवार को अवकाश घोषित करने को भी मंजूरी दी है।
हालांकि, यह स्वास्थ्य, बिजली एवं ऊर्जा, शिक्षा और रक्षा क्षेत्रों के कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा।
मंत्रिमंडल ने खाद्य संकट को कम करने के लिए कृषि में संलग्न होने के लिए सरकारी अधिकारियों को अगले तीन महीनों के लिए प्रति सप्ताह एक दिन की छुट्टी देने को भी मंजूरी दी है।
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