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‘वेस्ट टू वेल्थ मिशन’ के तहत दिल्ली में बारापुल्ला नाले के 3 किमी लंबे हिस्से की सफाई और गाद निकालने का एक वर्ष तक चला कार्य संपन्न

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने डीएम-80 ड्रेनमास्टर के क्रिया-कलापों को देखने के लिए 20 मार्च, 2023 को दक्षिण दिल्ली में भोगल मार्केट के पास बारापुल्ला नाले के हिस्से का दौरा किया। बारापुल्ला नाले की सफाई और गाद निकालने के कार्य में उपयोग में लाया गया यह स्व-चालित ड्रेनमास्टर मैसर्स क्लीनटेक इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित जल तथा स्थल पर चलने योग्य उत्खनन की तकनीक है। बारापुल्ला नाले की सफाई और गाद निकालने की यह पहल वेस्ट टू वेल्थ मिशन, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के तहत की गई है।

इस अवसर पर बोलते हुए, प्रोफेसर अजय के.सूद ने सफाई की इस तकनीक और बारापुल्ला नाले को साफ करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, “मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि ड्रेनमास्टर डीएम-80 के साथ एक साल की अवधि वाली यह परीक्षण परियोजना (पायलट प्रोजेक्ट), जोकि शहरी नालों की सफाई की एक स्वदेशी तकनीक है, सफल साबित हुई है। यह इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि कैसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कचरे के निपटारे में आने वाली चुनौतियों का हल निकाल सकता है। बारापुल्ला नाले में इस परीक्षण परियोजना (पायलट प्रोजेक्ट) की सफलता ने हमें देश भर में नालों की सफाई में इस तरह की प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने और उन्हें लागू करने का विश्वास दिलाया है।

भीड़भाड़ वाले इलाकों में खुले नालों की सफाई करना भारत में हमेशा एक चुनौती रही है क्योंकि वहां जोसेफ सिरिल बामफोर्ड (जेसीबी)उत्खनन की मशीन और पोकलेन आदि जैसे पारंपरिक उपकरणों की पहुंच नहीं होती है या फिर सीमित पहुंच होती है। इसके अलावा, नाले के दोनों किनारों पर स्थित तंग गलियों वाली मानव बस्तियां एकत्रित कचरे के निस्तारण को कठिन बना देती हैं। दक्षिण दिल्ली का बारापुल्ला नाला एक ऐसा नाला है जो विभिन्न स्थानों पर नालियों, कचरे और मलबे के करण अवरुद्ध है। इसके परिणामस्वरूप दुर्गंध, वेक्टर जनित रोग एवं अस्वास्थ्यकर स्थितियां पैदा होती हैं और मानसून में बाढ़ आती है।

इस गंभीर समस्या का समाधान करने हेतु, ‘वेस्ट टू वेल्थ मिशन’ ने दक्षिण दिल्ली नगर निगम (अब दिल्ली नगर निगम) के साथ मिलकर संयुक्त रूप से एक स्वदेशी व अनुकूलित उत्खनन की मशीन- ड्रेनमास्टर डीएम-80 को मैसर्स क्लीनटेक इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई द्वारा डिजाइन करवाया और विकसित किया। डीएम-80 यूनिट का चयन निर्माण और विध्वंस के समय पैदा होने वाले मलबे सहित मिश्रित कचरे, जिन्हें हटाना और उनका निस्तारण करना बहुत कठिन होता है, से भरे शहरी नालों की सफाई के लिए प्रौद्योगिकियों के मामले में आने वाले महत्वपूर्ण अंतर को पाटने के उद्देश्य से किया गया था।

यह एक स्व-चालित, परिवहन योग्य और जल तथा स्थल पर चलने योग्य मशीन है जिसमें बहुउद्देश्यीय संलग्नक हैं जो प्रतिदिन 50-100 घनमीटर कचरे को हटाने में सक्षम हैं और शहरी नालों (7 मीटर से अधिक चौड़ाई वाले) की सफाई के दौरान आने वाली विभिन्न सीमाओं से पार पाने में सक्षम है। इसकी यह विशेषता इसे देश के शहरी क्षेत्रों में उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीक बनाती है।

डीएम-80 यूनिट को एक साल के लिए 3 जनवरी, 2022 से 2 जनवरी, 2023 तक संचालित किया गया था। इस अवधि के दौरान,क्लीनटेक इंफ्रा ने सन डायल पार्क से लेकर जंगपुरा तक बारापुल्ला नाले के लगभग तीन किलोमीटर के हिस्से की सफाई और गाद निकालने के लिए इस यूनिट का संचालन करते हुए लगभग 3000 टन कचरे को हटाया। दिल्ली नगर निगम ने नाले से निकाले गए इस कचरे के निपटान के लिए सहायक उपकरण प्रदान किए।

दिल्ली नगर निगम दिल्ली के अन्य नालों की सफाई के लिए ड्रेनमास्टर डीएम-80 यूनिट को तैनात करने पर विचार कर रहा है।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय में वैज्ञानिक सचिव डॉ. परविंदर मैनी ने कहा,“वेस्ट टू वेल्थ मिशन के तहत पीएसए के कार्यालय द्वारा बारापुल्ला नाले से गाद निकालना एक उत्कृष्ट पहल है और हमें यह देखना होगा कि बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ इस पहल को आगे कैसे बढ़ाया जाए।”

इस दौरे में पीएसए कार्यालय के सलाहकार डॉ. मनोरंजन मोहंती, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की अतिरिक्त आयुक्त साक्षी मित्तल, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) में निदेशक बिनय झा,एमसीडी (दक्षिण) के प्रमुख अभियंता पी.सी. मीणा,एमसीडी (पूर्व) के प्रमुख अभियंता दिलीप रमनानी, एमसीडी (दक्षिण) के मुख्य अभियंता सुधीर मेहता और एमसीडी, पीएसए कार्यालय एवं वेस्ट टू वेल्थ मिशन के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

वेस्ट टू वेल्थ मिशन के बारे में: भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (ओ/ओ पीएसए) के कार्यालय की अगुवाई में संचालित वेस्ट टू वेल्थ मिशन का उद्देश्य देश में कचरा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने हेतु नवीनतम उपायों और मॉडलों का उपयोग करके लैंडफिल मुक्त और कचरा मुक्त राष्ट्र बनाने का लक्ष्य हासिल करना है। इसका उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का लाभ उठाकर स्वच्छ भारत मिशन तथा स्मार्ट सिटी परियोजना को बढ़ावा देना और उन्हें आगे ले जाना है।

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