अवसंरचना संबंधी क्षमता निर्माण में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष अजय बांगा ने 20 दिसंबर 2023 को नई दिल्ली में अजय सेठ, सचिव, आर्थिक कार्य विभाग (डीईए), वित्त मंत्रालय, भारत सरकार ; डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन, मुख्य आर्थिक सलाहकार, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार और परमेश्वरन अय्यर, कार्यकारी निदेशक, विश्व बैंक समूह की उपस्थिति में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) बिगिनर्स ई-कोर्स लॉन्च किया।
पीपीपी ई-कोर्स अवसंरचना वित्त सचिवालय, डीईए और विश्व बैंक द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया अवसंरचना पर केंद्रित क्षमता-निर्माण कार्यक्रम है। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य भारत में पीपीपी के गतिशील क्षेत्र को समझने और इसमें योगदान देने के इच्छुक व्यक्तियों को इसका मूलभूत ज्ञान और अंतर्दृष्टि प्रदान करना है। पीपीपी से संबंधित इस पाठ्यक्रम में 5 मॉड्यूल शामिल हैं, जो पीपीपी परियोजनाओं के विकास से जुड़े प्रमुख तत्वों को कवर करते हैं, जिनमें पीपीपी का परिचय, पीपीपी परियोजनाओं की पहचान, परियोजनाओं की संरचना, निविदा और कार्यान्वयन तथा पीपीपी परियोजनाओं की निगरानी के पहलू शामिल हैं। इससे देश के विभिन्न ढांचागत क्षेत्रों में सफल पीपीपी परियोजनाओं के विन्यास और कार्यान्वयन में मदद मिलेगी।
अवसंरचना आर्थिक विकास का उत्प्रेरक है और सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण फोकस क्षेत्र है। अवसंरचना के विकास की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। पीपीपी अवसंरचना परियोजनाओं और अन्य ढांचागत पहलों को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए प्रभावी योजना, कार्यान्वयन और रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए सुदृढ़ क्षमता निर्माण की आवश्यकता होती है। वर्तमान में जारी प्रशिक्षण प्रयासों की आवश्यकता पर बल देते हुए, अवसंरचना के विकास के अंतर्गत प्रबल चुनौतियों का सामना करने की दिशा में निरंतर सीखना और अनुकूलन महत्वपूर्ण है।
इस पाठ्यक्रम की अवधि 7 घंटे और 15 मिनट है लेकिन इसे स्व-गति से डिज़ाइन किया गया है। इस पाठ्यक्रम को ग्रहण करने वालों को इसके लिए पीपीपी में किसी पूर्व अनुभव की आवश्यकता नहीं है।
पीपीपी बिगनर्स ई-कोर्स की मुख्य विशेषताएं:
1.सुलभ शिक्षा:
यह पाठ्यक्रम ऑनलाइन उपलब्ध है और देश भर में व्यापक लोगों तक पहुंच सुनिश्चित करता है।
इसके स्व-गति वाले मॉड्यूल सीखने की विविध प्राथमिकताओं और शेड्यूल को समायोजित करते हैं।
2.विशेषज्ञों द्वारा निर्धारित सामग्री:
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं द्वारा प्रस्तुत यह पाठ्य सामग्री पीपीपी में वर्तमान रुझानों और सर्वोत्तम प्रथाओं को दर्शाती है।
वास्तविक दुनिया से जुड़ी केस स्टडीज सफल पीपीपी मॉडल के बारे में व्यावहारिक अंतर्दृष्टि प्रदान करती हैं।
3.इंटरएक्टिव लर्निंग:
मल्टीमीडिया तत्वों, क्विज़ और चर्चाओं को शामिल करने से इंटरैक्टिव लर्निंग के अनुभव को बढ़ावा मिलता है।
4. प्रमाण पत्र:
ई-कोर्स के पूरा होने पर शिक्षार्थियों को पीपीपी अवसंरचना संबंधी सिद्धांतों में उनकी दक्षता को मान्यता प्रदान करने वाला प्रमाण पत्र प्राप्त होगा।
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