विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) को बंद किए जाने के बाद से 853 एफडीआई प्रस्तावों का निपटारा विदेशी निवेश सुविधा पोर्टल (एफआईएफ) के माध्यम से किया गया है। एफआईपीबी को बंद करने के प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 मई, 2017 की अपनी बैठक में मंजूरी दी थी। विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) के समापन के बाद, मौजूदा एफडीआई नीति और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा – एफईएमए) विनियमों के तहत विदेशी निवेश के लिए सरकार की स्वीकृति देने का कार्य संबंधित प्रशासनिक मंत्रालयों/विभागों और उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) को सौंपा गया था तथा इसके लिए वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय को नोडल विभाग बनाया गया।
इसके बाद से एफडीआई प्रस्तावों को उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा संचालित विदेशी निवेश सुविधा पोर्टल (एफआईएफ पोर्टल) https://fifp.gov.in पर ही जमा करवाना आवश्यक था। एफआईएफ पोर्टल पर जमा किए गए प्रस्तावों को संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय को अग्रेषित करने के साथ-साथ एफडीआई नीति/एफईएम विनियमों के अनुसार आवश्यक टिप्पणियों के लिए विदेश मंत्रालय (एमईए) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को प्रेषित करने के अलावा आवश्यक सुरक्षा स्वीकृतियों के लिए गृह मंत्रालय (एमएचए) को भी भेजा जाता है।
एफआईएफ पोर्टल के माध्यम से फाइल किए जाने वाले दस्तावेजों सहित एफडीआई प्रस्तावों को आगे की प्रक्रिया में लाने के लिए डीपीआईआईटी ने 29 जून, 2017 एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) निर्धारित और तैयार की थी और जिसमें 09 जनवरी, 2020 को फिर से संशोधन किया गया था।
उसके बाद से न केवल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में वृद्धि हुई है, बल्कि भारत में एफडीआई लाने वाले देशों की संख्या भी बढ़ी है। वित्त वर्ष 2014-15 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह मात्र 45.15 बिलियन अमरीकी डॉलर था, जो 2016-17 में बढ़कर 60.22 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गया और कोविड-19 महामारी और हाल ही में रूस-यूक्रेन संघर्ष के बावजूद वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान यह सर्वाधिक बढ़कर 83.57 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है । वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 101 देशों से एफडीआई की सूचना मिली है, जबकि इससे पहले के पिछले वित्तीय वर्ष (2020-21) के दौरान 97 देशों से इसकी सूचना मिली थी।
एफडीआई प्रस्तावों की विचाराधीनता को विनियमित करने के लिए संबंधित मंत्रालयों/विभागों को एसएमएस और ईमेल के माध्यम से स्वचालित अलर्ट का उपयोग किया जा रहा है। सचिव, डीपीआईआईटी मासिक आधार पर सभी मंत्रालयों/विभागों में लंबित/विचाराधीन एफडीआई प्रस्तावों की समीक्षा करते हैं। इससे एफडीआई प्रस्तावों के निपटान में तेजी आई है। मंत्रालयों/विभागों को एफडीआई प्रस्ताव के विवेकपूर्ण और त्वरित प्रसंस्करण के संबंध में जानकारी देने के लिए नियमित प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं।
जमीनी स्तर पर सामने आ रहे व्यावहारिक मुद्दों और समस्याओं के बारे में अद्यतन जानकारी रखने के लिए निवेशकों और विधि फर्मों के साथ नियमित गोलमेज बैठकों का आयोजन किया जाता है। आवेदकों पर अनुपालन का बोझ कम करने के लिए एफआईएफ पोर्टल पर एफडीआई प्रस्ताव प्रपत्र की नियमित रूप से समीक्षा की जाती है। अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) को अद्यतन किया गया है और उन तक पहुंच में आसानी के लिए इन्हें डीपीआईआईटी वेबसाइट और एफआईएफ पोर्टल पर रखा गया है। इस प्रकार यह सुनिश्चित करने के लिए कि भारत एक निवेशक अनुकूल गंतव्य बना रहे, डीपीआईआईटी द्वारा निरंतर प्रयास किए जाते हैं।
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