समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम उठाते हुए, होर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति पर आयोजित उच्च-स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समीक्षा बैठक का मुख्य केंद्र भारत की पोत परिवहन क्षमताओं को तेज़ करना रहा। इस बैठक में मज़बूत और भविष्य के लिए तैयार समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर नए सिरे से ज़ोर दिया गया।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने की। इस बैठक में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सरकारी क्षेत्र की तेल कंपनियों, रसायन और उर्वरक मंत्रालय, पोत परिवहन महानिदेशालय, राष्ट्रीय पोत परिवहन बोर्ड और विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, हम पोत परिवहन को भारत की आर्थिक मज़बूती के केंद्र में स्थापित कर रहे हैं। आत्मनिर्भर पोत परिवहन की दिशा में हमारी यात्रा रणनीतिक आवश्यकता है। हम वित्त वर्ष 2026-27 में 62 जहाज़ों को शामिल करने के लिए रूपरेखा पर आगे बढ़ रहे हैं। इस योजना को ₹51,383 करोड़ का समर्थन प्राप्त है, जिससे 2.85 मिलियन जीटी की अतिरिक्त क्षमता का सर्जन होगा।”
मौजूदा वैश्विक परिदृश्य और समुद्री व्यापार मार्गों पर इसके प्रभावों की समीक्षा करते हुए, मंत्री ने भारत की पोत परिवहन क्षमता के तत्काल विस्तार का आह्वान किया। इसमें कंटेनर जहाज़, एलपीजी और कच्चा तेल ले जाने वाले जहाज़ (क्रूड कैरियर), और हरित टग शामिल हैं, ताकि बाहरी व्यवधानों के विरुद्ध मज़बूती सुनिश्चित की जा सके। सोनोवाल ने प्रमुख समुद्री क्षेत्रों में कार्गो के प्रवाह, जहाज़ों की आवाजाही और परिचालन संबंधी तैयारियों की भी समीक्षा की। मंत्री ने भविष्य की किसी भी वैश्विक चुनौती से निपटने और देश की सप्लाई चेन को बनाए रखने के लिए कंटेनर फ्लीट, ग्रीन टग्स, एलपीजी कैरियर, क्रूड कैरियर, ड्रेजिंग वेसल और टैंकरों के विस्तार की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। पोत परिवहन मंत्री ने भारतीय पोत परिवहन निगम (एससीआई) और सरकारी तेल कंपनियों (ऑयल पीएसयू) के बीच 59 जहाज़ खरीदने के लिए संयुक्त उपक्रम की स्थिति की भी समीक्षा की।
केंद्रीय मंत्री ने समन्वित राष्ट्रीय प्रयास की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा, “हमें अपने फ्लीट, जहाज़ बनाने की क्षमता, बंदरगाह के बुनियादी ढांचे और व्यापक समुद्री इकोसिस्टम को मज़बूत करने के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए।”
व्यवस्थित नीतिगत प्रतिक्रिया को निर्देशित करते हुए, सोनोवाल ने सभी संबंधित विभागों को संक्षिप्त और कार्रवाई योग्य ‘श्वेत पत्र’ तैयार करने का निर्देश दिया। इस श्वेत पत्र में समुद्री क्षेत्र के प्रमुख स्तंभों में मौजूदा कमियों की जानकारी देते हुए उनका समाधान करने, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने और समय-सीमा-बद्ध रूपरेखा तैयार की जानी चाहिए। सोनोवाल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह कवायद पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, रसायन और उर्वरक, तथा वाणिज्य और उद्योग मंत्रालयों के साथ घनिष्ठ समन्वय में की जानी चाहिए, क्योंकि समुद्री आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ इन मंत्रालयों का जुड़ाव अत्यंत महत्वपूर्ण है।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने यह भी कहा, “यह दस्तावेज़ बड़े अंतर-मंत्रालयी मंच पर हमारी अगली समीक्षा का आधार बनेगा। मुझे केंद्रित, व्यावहारिक और परिणाम-उन्मुख सुझावों की अपेक्षा है। आइए, हम स्पष्टता, समन्वय और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ें।”
मंत्री ने इस बात को भी दोहराया कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा और संरक्षा सर्वोपरि है; इसके साथ ही, संबंधित एजेंसियों को संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में कड़ी निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। अंतर-मंत्रालयी बैठक का समापन मंत्रालयों और संबंधित पक्षों के बीच अधिक तालमेल, समन्वय और बेहतर कार्यान्वयन के आह्वान के साथ हुआ। इसका उद्देश्य भारत को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी समुद्री राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है।
सरकार इस क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर लगातार बारीकी से नज़र रख रही है, और साथ ही भारत की समुद्री क्षमताओं को सुदृढ़ करने तथा वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति को सुरक्षित करने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों को आगे बढ़ा रही है।
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