वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि निरंतर प्रयासों और प्रभावी नीतिगत योजनाओं ने भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला दिया है। इसके परिणामस्वरूप यह दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो गई है। उन्होंने जोर दिया कि मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो जाएगा। वे आज राज्यसभा में भारतीय अर्थव्यवस्था पर श्वेत पत्र पर चर्चा का जवाब दे रही थीं।
वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्यक्तिगत रूप से जमीनी स्तर पर विकास परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी करते हैं। यूपीए सरकार के दौरान आर्थिक कुप्रबंधन की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले शासन के दौरान 18 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं रुकी हुई थीं। इस सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक की 348 लंबित परियोजनाओं को मंजूरी दी। निर्मला सीतारमण ने लोगों तक लाभ नहीं पहुंचाने के लिए यूपीए सरकार की आलोचना की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यूपीए ने अपने शासनकाल के दौरान सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय जैसी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया था। महंगाई के मोर्चे पर वित्त मंत्री ने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान मुद्रास्फीति की दर 4 प्रतिशत से नीचे थी जबकि यूपीए शासन के दौरान मुद्रास्फीति की औसत दर 8.2 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। वित्तमंत्री ने कहा कि यूपीए सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए गलत राजकोषीय नीतियां बनाई तथा सब्सिडी और फिजूलखर्ची की गई। बुनियादी ढांचे की जरूरतों को दरकिनार कर पूर्वोत्तर राज्यों की आकांक्षाओं की अनदेखी करने के का भी निर्मला सीतारमण ने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की आलोचना की।
इससे पहले चर्चा की शुरुआत करते हुए भाजपा के सुशील मोदी ने यूपीए शासन के दौरान हुई अनियमितताओं, घोटालों और कांग्रेस नेताओं की संलिप्तता पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर दिया कि पिछले 10 वर्षों में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगाया गया है। सुशील मोदी ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा मजबूत आधार दिए जाने के बावजूद यूपीए की गलत नीतियों के कारण बैंकिंग क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज देश बैंकिंग के स्वर्ण युग में है। भाजपा सांसद ने लोगों के कल्याण के लिए सरकार के कई कल्याणकारी कदमों पर प्रकाश डाला।
कांग्रेस के के सी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि श्वेत पत्र में देश की आर्थिक स्थिति का भयावह सच छुपाया गया है। उन्होंने सवाल किया कि सरकार ने श्वेत पत्र में नोटबंदी के असर और देश में काला धन वापस लाने का जिक्र क्यों नहीं किया है। उन्होंने कहा, नोटबंदी के दुष्प्रभाव से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुआ है। तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले ने कहा कि सरकार ने हर साल 2 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन पिछले 5 वर्षों में कथित तौर पर केवल 2 करोड़ 70 लाख नौकरियां ही दी गईं। बाद में टीएमसी सदस्यों ने श्वेत पत्र का विरोध करते हुए वॉकआउट किया। द्रमुक के तिरुचि शिवा ने कोविड महामारी के दौरान लॉकडाउन के मुद्दे पर सरकार से सवाल किया और कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण सैकड़ों लोगों की मौत हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि क्षेत्र के लिए बजटीय समर्थन कम हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि गैर-लाभकारी सार्वजनिक उपक्रमों का विनिवेश किया जा रहा है, यह अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है।
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