कोयला मंत्रालय ने नीलामी के लिए महाराष्ट्र राज्य से 13 कोयला खंडों की पेशकश की है। केंद्रीय संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आज मुंबई में एक निवेशक सम्मेलन में बताया कि इनमें से 5 कोयला खंड पूरी तरह से खोजे जा चुके हैं और 8 कोयला खंडों का आंशिक रूप से पता लगाया जा चुका है।
पहले पांच चरणों में 64 कोयला खदानों की सफल नीलामी के बाद, कोयला मंत्रालय ने वाणिज्यिक नीलामी के छठे दौर के अंतर्गत 133 कोयला खदानों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की थी, जिनमें से 71 कोयला खदानें नई कोयला खदानें हैं और 62 कोयला खदानें चालू हैं। नवंबर 2022 में वाणिज्यिक नीलामी के पहले चरणों का आयोजन किया गया था। इसके अतिरिक्त, वाणिज्यिक नीलामी के 5वें दौर के दूसरे प्रयास के अंतर्गत आठ कोयला खदानों की भी शुरूआत की गई है, जहां पहले प्रयास में एकल बोली प्राप्त हुई थी। इसलिए ग्यारह कोयला उत्पादक राज्यों को शामिल करने वाली 141 खदानों की सबसे बड़ी खेप इस बार पेश की जा रही है।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, “कोयले की हमारी आवश्यकता बढ़ रही है, वर्ष 2013-14 में हमने कुल 572 मिलियन टन कोयले की लदान की थी, पिछले वर्ष यह 817 मिलियन टन थी और इस वर्ष यह 900 मिलियन टन होगा। इसके बावजूद घरेलू उत्पादन से देश की कोयले की मांग को पूरा नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जहां कुल घरेलू कोयले का उत्पादन 1 अरब टन होगा, वहीं कुल मांग 1,300 – 1,400 मिलियन टन होगी। कोयला मंत्री ने कहा कि अब चूंकि, देश कोयला क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य बना रहा है, इस पर विचार-विमर्श चल रहा है कि देश स्थायी कोयला खनन कैसे कर सकता है।
कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि वर्ष 2040 तक बिजली की मांग दोगुनी हो जाएगी। देश की ऊर्जा सुरक्षा को काफी महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा, “भले ही हम अक्षय स्रोतों से 50 प्रतिशत ऊर्जा का उत्पादन करते हैं, इसके बावजूद हमें लगभग 1.5 बिलियन टन कोयले की आवश्यकता होगी, इसलिए कोयले के भविष्य के बारे में चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन गैसीकरण का है। टिकाऊ कोयला खनन के इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में, गैसीकरण में न्यूनतम 10 प्रतिशत उपयोग के लिए वाणिज्यिक कोयला खनन में 50 प्रतिशत की छूट दी गई है। साथ ही, उन्होंने कहा कि पीएलआई योजना के अंतर्गत 6,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, कोयला गैसीकरण को प्रोत्साहन दिया गया है और प्रवेश बाधाओं को हटाने से उद्योग में नई कंपनियां आकर्षित हुई हैं।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि आवंटित कोयला खंडों के संचालन में तेजी लाने के लिए खदान संयंत्र और भूवैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुमोदन की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और एकल खिडकी निस्तारण की प्रक्रिया लागू की गई है। उन्होंने कहा कि कोयला मंत्रालय ने परियोजना निगरानी इकाई का संचालन किया है और प्रवेश बाधाओं को हटा दिया है।
कोयला मंत्री ने ओडिशा में कोयला खनन में प्रगति का उदाहरण देते हुए बताया कि 2014-15 में खनन से राज्य का राजस्व लगभग 5,000 करोड़ रुपये और 2020-21 में खनन क्षेत्र में बड़े बदलावों की स्थापना के बाद 50,000 करोड़ रुपये हो गया है। केंद्रीय कोयला मंत्री ने कहा कि सहकारी संघवाद की भावना का आह्वान करते हुए केंद्र और राज्य मिलकर कोयला और खनन क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन करेंगे और अर्थव्यवस्था में सकारात्मक योगदान देंगे।
केंद्रीय रेलवे, कोयला और खान राज्य मंत्री रावसाहेब पाटिल दानवे ने कहा कि कोयला क्षेत्र का उत्तरदायित्व है कि वह न केवल बिजली का उत्पादन करे, बल्कि पर्यावरण की रक्षा भी करे। उन्होंने कहा, “जिन किसानों की जमीन कोयला या खनन ब्लॉक के लिए ली गई है, उनके पुनर्वास की जिम्मेदारी हमारी है, मुझे विश्वास है कि हम सब मिलकर इस जिम्मेदारी को पूरा करेंगे।” रावसाहेब दानवे पाटिल ने आगे कहा, “वर्ष 2030 तक, हम 1.5 बिलियन टन का कोयला उत्पादन प्राप्त कर लेंगे।”
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि राज्य सरकार विदर्भ और कोंकण क्षेत्रों में महाराष्ट्र खनन गहन निवेशक-अनुकूलन का विशाल केंद्र बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि यह इन क्षेत्रों में खनिज अनुकूल उद्योगों को प्रोत्साहित करेगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “सही नीतिगत उपायों के साथ, हम आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास के लिए बिना उपयोग वाली खनिज क्षमता का पता लगा सकते हैं।” उन्होंने केंद्रीय कोयला मंत्रालय से झारखंड में शुरू किए गए संस्थान की तर्ज पर महाराष्ट्र में एक कोयला अनुसंधान संस्थान शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र द्वारा महाराष्ट्र में 20 बंद खदानों को फिर से शुरू करने से क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।
कोयला सचिव अमृत लाल मीणा ने कहा कि कोयले में निवेश लंबी अवधि के रिटर्न, ऊंची दर और आने वाले समय में कोयले की सुनिश्चित मांग प्रदान करता है।
महाराष्ट्र के खनन मंत्री दादाजी भुसे ने भी इस विचार-विमर्श में भाग लिया। इससे पहले दिन में, केंद्रीय कोयला मंत्री और केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री ने राज्य की एमएएचएजीईएनसीओ सहित बिजली उत्पादन कंपनियों के साथ समीक्षा बैठक की और उन्हें कोयले की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित का आश्वासन दिया।
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