लोकसभा में दूरसंचार विधेयक 2023 को विचार और पारित करने के लिए पेश किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक और प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दूरसंचार सेवाओं और दूरसंचार नेटवर्क के विकास, विस्तार और संचालन से संबंधित कानून में संशोधन के लिए ये विधेयक पेश किया। विधेयक के अनुसार दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को उपयोगकर्ताओं का सत्यापन बायोमेट्रिक-आधारित पहचान के माध्यम से करनी होगी। केंद्र सरकार दूरसंचार से संबंधित गतिविधियों को नियमित करेगी और स्पेक्ट्रम आवंटित करेगी। पाबंदी से संबंधित प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय केंद्र सरकार निर्धारित करेगी।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि विधेयक भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम 1885 की जगह लेगा। उन्होंने कहा कि यह विधेयक वर्तमान आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लाया गया है। पिछले साढ़े नौ वर्षों में डिजिटल इंडिया के क्षेत्र में बड़ी क्रांति आई है, जिसने लोगों का जीवन बदल दिया है। उन्होंने कहा कि 2014 में छह लाख दूरसंचार टावरों के मुकाबले इनकी संख्या बढ़कर 25 लाख हो गई है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इसके अलावा, ब्रॉडबैंड सेवाओं के उपयोगकर्ताओं की संख्या 2014 में डेढ़ करोड़ की तुलना में अब 85 करोड़ से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि पिछले 14 महीनों में चार लाख से ज्यादा 5G मोबाइल टावर लगाए गए हैं।
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