राष्ट्र आज महान स्वतंत्रता सेनानियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को उनके शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। इन्हें 1931 में 23 मार्च को लाहौर की केंद्रीय जेल में फांसी दी गई थी। तीनों क्रांतिकारियों पर 17 दिसंबर, 1928 को ब्रिटिश पुलिस अधिकारी सांडर्स की गोली मारकर हत्या करने का आरोप था।
बरतानवी हुकुमत ने शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को निर्धारित तिथि से एक दिन पहले फांसी देने के बाद, उनके शवों को गुप्त रूप से फिरोजपुर के हुसैनीवाला में सतलुज नदी के तट पर ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया था। हुसैनीवाला में स्थित राष्ट्रीय शहीद स्मारक इन तीनों शहीदों की अदम्य क्रांतिकारी भावना को दर्शाता हैI
सीमा सुरक्षा बल, पंजाब ने अपनी हीरक जयंती समारोह के हिस्से के रूप में एक अनोखी पहल करते हुए, कल ‘फिरोजपुर-हुसैनीवाला सीमा मैराथन’ का आयोजन किया। इस मैराथन का उद्देश्य इन तीनों महान क्रान्तिकारियों के सर्वोच्च बलिदान को सम्मान देना था। फिरोजपुर रेलवे डिवीजन ने भी फिरोजपुर कैंट से हुसैनीवाला तक जाने के लिए 6 जोड़ी विशेष शहीदी मेला रेलगाड़िया शुरू की हैं। देश के लिए इन वीरों के सर्वोच्च बलिदान को याद करने हेतु, शहीद भगत सिंह के पैतृक गाँव खटकड़ कलां में एक राज्य-स्तरीय कार्यक्रम भी आयोजित किया जा रहा है।
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