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राष्ट्रपति ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के 19वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज हरियाणा के करनाल में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर – एनडीआरआई) के 19वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया और उसे संबोधित किया।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि डेयरी उद्योग हमारे देश की खाद्य एवं पोषण संबंधी सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता है। डेयरी सेक्टर हमारे देश की जीडीपी में लगभग 5 प्रतिशत का योगदान भी देता है तथा भारत में लगभग 8 करोड़ परिवारों को आजीविका उपलब्ध कराता है। इसलिए, एनडीआरआई जैसे संस्थानों को देश के समावेशी विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करना है।

राष्ट्रपति ने कहा कि गौ तथा अन्य पशुधन भारतीय समाज और परंपराओं के अभिन्न अंग रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि एनडीआरआई ने अधिक दूध देने वाली भैंसों और गायों के क्लोन का निर्माण करने के लिए प्रौद्योगिकी विकसित की है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि करेगी तथा किसानों की आय बढ़ाएगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि दुग्ध तथा दुग्ध के उत्पाद सदैव भारतीय भोजन तथा संस्कृति के अभिन्न अंग रहे हैं। भारत विश्व में सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, लेकिन हमें दुग्ध के उत्पादों की बढ़ती मांग की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, डेयरी सेक्टर भी अच्छी गुणवत्ता वाले चारे की उपलब्धता, जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में बदलाव और पशुधन में रोगों जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। दुग्ध उत्पादन और डेयरी फार्मिंग को टिकाऊ बनाना हमारे सामने एक चुनौती है। पशु कल्याण को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण के अनुकूल और जलवायु स्मार्ट प्रौद्योगिकीयों को अपनाकर डेयरी उद्योग का विकास करना हम सभी का उत्तरदायित्व है। राष्ट्रपति को यह जानकर प्रसन्नता हुई कि एनडीआरआई, डेयरी फार्मों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने के लिए विभिन्न प्रौद्योगिकीयों को बढ़ावा दे रहा है। इसके साथ-साथ, एनडीआरआई बायोगैस उत्पादन जैसी स्वच्छ ऊर्जा पर भी बल दे रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाएं भारत में डेयरी उद्योग के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। यह सेक्टर महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसलिए, उन्हें शिक्षा, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास में और अधिक अवसर उपलब्ध कराये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि डेयरी सेक्टर में उद्यम की स्थापना करने के लिए महिलाओं को सरल ऋण तथा बाजार पहुंच भी उपलब्ध कराये जाने की आवश्यकता है।

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