रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों ने दुनिया को यह संदेश दिया कि यद्यपि भारत एक शांतिप्रिय राष्ट्र है जो ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘अहिंसा परमो धर्म’ में विश्वास करता है, लेकिन यह किसी को भी राष्ट्र की संप्रभुता, अखंडता और एकता को नुकसान नहीं पहुंचाने देगा।
राजनाथ सिंह ने कहा, ‘भारत ने न केवल अपने लिए शांति की कामना की है, बल्कि दुनिया को संदेश दिया है। भगवान बुद्ध और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जैसे दूरदर्शी व्यक्तित्व विश्व को भारत की देन हैं। हमने कभी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया और न ही उसे गुलाम बनाया। लेकिन पोखरण परीक्षण ने संदेश दिया कि हम अपनी गरिमा के खिलाफ उठाए गए हर कदम का मुंहतोड़ जवाब देंगे।‘
उन्होंने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस को देश की तकनीकी उपलब्धियों को स्वीकार करते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा बताया। उन्होंने राष्ट्र की प्रगति में विज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे शक्ति का स्रोत बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण युवाओं को राष्ट्र निर्माण में योगदान करने के लिए प्रेरित करता है और समग्र विकास सुनिश्चित करता है।
रक्षा मंत्री का विचार था कि भारत जनसांख्यिकीय लाभांश के दौर से गुजर रहा है। उसके पास शक्तिशाली मानव संसाधन है, जिसने इसे विश्व मंच पर एक सम्मानजनक स्थिति में पहुंचाया है। उन्होंने सुदृढ़, समृद्ध और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इस मानव संसाधन का अधिकतम उपयोग करने का आह्वान किया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। वैश्विक मंच पर हमारा कद बढ़ा है और दुनिया, भारत में आशा की एक नई किरण देख रही है। हम एक सुदृढ़ और आत्मनिर्भर ‘न्यू इंडिया’ के निर्माण के अपने दृष्टिकोण को साकार करने में सफल होंगे।
कार्यक्रम का स्थल प्रगति मैदान (हॉल नंबर 5 और 4), नई दिल्ली है। अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग, डीएसटी, डीआरडीओ, डॉस, डीएई, सीएसआईआर, डीबीटी, एमओईएस, डीओटी, एमईआईटीवाई, एआईसीटीई औरडीपीआईआईटी जैसे हितधारक मंत्रालय और विभाग इस भव्य एक्सपो में भाग ले रहे हैं।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) का एक मंडप स्थापित किया गया है, जिसमें 30 से अधिक डीआरडीओ प्रयोगशालाएं, पांच डीआरडीओ युवा वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं (डीवाईएसएल), प्रौद्योगिकी विकास निधि (टीडीएफ), डीआरडीओ उद्योग अकादमी-उत्कृष्टता केंद्र (डीआईए-सीओई) और ब्रह्मोस हिस्सा ले रहे हैं। ये विषय के अनुरूप स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित प्रणालियों, प्रौद्योगिकियों और नवाचारों की एक श्रृंखला का प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल के वर्षों में उद्योग के सहयोग से डीआरडीओ ने कई नवीन प्रौद्योगिकियों और उत्पादों को विकसित किया है। इनका प्रदर्शन किया जा रहा है। टीडीएफ और डीआईए-सीओई के तहत 12 लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) और उद्योग भाग ले रहे हैं।
प्रतिष्ठित अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) में, डीआरडीओ डेबेल बेंगलुरु द्वारा विकसित एक्सोस्केलेटन और एयरबोर्न कम्युनिकेशन सिस्टम मेजर्स (सीएसएम) के लिए एआई आधारित ऑडियो ट्रांसक्रिप्शन ट्रांसलेशन और सीएबीएस बेंगलुरु द्वारा विकसित संबद्ध एआई टूलबॉक्स प्रदर्शित किया जा रहा है। एसएसपीएल दिल्ली द्वारा विकसित लेजर आधारित पानी के नीचे संचार प्रणाली; और डीवाईएसएल-एआई द्वारा विकसित बैटलफील्ड थिंग्स (आईओबीटी) का इंटरनेट को भी प्रदर्शित किया गया है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) 13 मई को प्रेरक वार्ताओं का आयोजन करेगा। इनमें डीआरडीओ युवा वैज्ञानिक प्रयोगशाला (डीवाईएसएल) के निदेशक, उद्योग और शिक्षाविद भाग लेंगे।
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