उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र सरकार की ओर से दाखिल उस प्रतिवेदन पर शुक्रवार को गौर किया, जिसमें उसने कहा है कि युद्धग्रस्त यूक्रेन में फंसे 17,000 भारतीयों को अभी तक वहां से निकाला जा चुका है।
प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण, न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल के बेंगलुरु निवासी फातिमा अहाना और कई अन्य मेडिकल छात्रों को निकालने के लिए किए गए व्यक्तिगत प्रयासों की सराहना की। रूस की 24 फरवरी को सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद ये लोग रोमानिया सीमा के पास फंसे हुए थे।
वेणुगोपाल ने पीठ को बताया कि युद्धग्रस्त यूक्रेन में फंसे 17,000 भारतीयों को अभी तक वहां से निकाला जा चुका है।
पीठ ने कहा, ‘‘ हम केन्द्र द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना करते हैं। अभी उस पर कुछ नहीं कह रहे हैं, लेकिन हम चिंतित भी हैं।’’
पीठ ने यूक्रेन से भारतीय छात्रों और अन्य लोगों को निकालने के लिए दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केन्द्र से कहा कि वह फंसे हुए लोगों के परिवारों के लिए एक ‘हेल्पडेस्क’ स्थापित करने पर विचार करे।
गौरतलब है कि रूस की सैन्य कार्रवाई से बुरी तरह प्रभावित यूक्रेन में फंस गए भारतीयों को वापस लाने के लिए केंद्र सरकार ‘‘ऑपरेशन गंगा’’ चला रही है।
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