अमेरिकी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी, मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने कैलेंडर वर्ष 2022 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि के अपने अनुमान को 7 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 दशमलव पांच प्रतिशत कर दिया है।
2020 के राष्ट्रीय लॉकडाउन और 2021 के मध्य में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के बाद हुए उम्मीद से अधिक मजबूत आर्थिक सुधार का हवाला देते हुए मूडीज ने भारत के लिए आर्थिक वृद्धि के अपने अनुमान को संशोधित किया।
मूडीज ने एक बयान में कहा कि उन्होंने भारत के लिए 2022 कैलेंडर वर्ष के विकास के पूर्वानुमान को बढ़ाया है और 2023 में 5 दशमलव 5 प्रतिशत की वृद्धि के पूर्वानुमान को ज्यों का त्यों बनाए रखा है। इसके चलते वित्त वर्ष 2022-23 में 8 दशमलव 4 प्रतिशत की वृद्धि और वित्त वर्ष 2023-24 में 6 दशमलव 5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान एजेंसी ने दिया है। हालांकि, एजेंसी ने तेल की ऊंची कीमतों और आपूर्ति में बाधाओं को आर्थिक वृद्धि पर एक दबाव के रूप में चिह्नित किया।
एजेंसी ने कहा कि अनुमान है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में वर्ष 2021 की अंतिम तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद का स्तर कोविड से पहले के स्तर के मुकाबले 5 प्रतिशत अधिक रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बिक्री कर संग्रह, खुदरा गतिविधि और पीएमआई आंकडें आर्थिक वृद्धि की गति तेज रहने का संकेत दे रहे हैं।
एजेंसी ने कहा कि 2022 के बजट में आर्थिक वृद्धि को प्राथमिकता दी गई और इस दिशा में वित्त वर्ष 2022-23 के लिए पूंजीगत व्यय के आवंटन में 36 प्रतिशत वृद्धि कर इसे सकल घरेलू उत्पाद का 2 दशमलव 9 प्रतिशत कर दिया गया। एजेंसी ने यह भी कहा कि आरबीआई ने अपनी फरवरी की बैठक में ब्याज दरों को ज्यों का त्यों छोडकर मौद्रिक नीति को सहायक बनाए रखा है।
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