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मिशन वन धन के तहत 27 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में 50,000 से अधिक वन धन स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) स्वीकृत

“सबका साथ, सबका विकास”के लक्ष्य को साकार करने और संकल्प पत्र 2019 में किए गए संकल्प को पूरा करने की दिशा में, “लोकल के लिए वोकल बनें, जनजातीय उत्पाद खरीदें” के नारे के साथ “आत्मनिर्भर भारत” के प्रधानमंत्री के आह्वान के अनुरूप, ट्राइफेड “संकल्प से सिद्धि – मिशन वन धन” को लागू कर रहा है। इस पहल के एक हिस्से के रूप में, मिशन वन धन का शुभारंभ जनजातीय कार्य मंत्री द्वारा 15 जून 2021 को किया गया था। इस मिशन ने 3,000 वन धन विकास केंद्र के क्लस्टरों (वीडीवीकेसी) में सम्मिलित 50,000 वन धन स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की स्थापना का लक्ष्य रखा है। ट्राइफेड राज्योंके नोडल विभागों, राज्यों की कार्यान्वयन एजेंसियों, भागीदारों, पिछले कुछ वर्षों में स्थापित किए गए प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थानों को शामिल करतेहुए विभिन्न भागीदारों के अपने इकोसिस्टम के माध्यम सेइस योजना को व्यवस्थित और कुशलता से लागू करने के लिए सक्रिय है।

दो वर्षों की छोटी सी अवधि में, इसने सफलतापूर्वक 27 राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों के 9.27 लाख लाभार्थियों को कवर करने वाले 3110 वन धन विकास केंद्र क्लस्टरों (वीडीवीकेसी) में सम्मिलित 52,976 वन धन स्वयं सहायता समूहों (वीडीएसएचजी) को स्वीकृत किया है। ये वन धन विकास केंद्र क्लस्टर (वीडीवीकेसी) विकास के विभिन्न चरणों में हैं और अब तक इनकी सफलता की कई कहानियां सामने आई हैं। महाराष्ट्र, मणिपुर, तमिलनाडु, कर्नाटक, ओडिशा, केरल, त्रिपुरा, गुजरात, सिक्किम, आंध्र प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में स्थित वन धन विकास केंद्र क्लस्टरों (वीडीवीकेसी) ने सभी 27 प्रतिभागी राज्यों के साथ-साथ लगभग 600 किस्मों के उत्पादों का उत्पादन शुरू कर दिया है।

ट्राइफेड जनजातीय लोगों के सशक्तिकरण के लिए कई उल्लेखनीय पहलों को लागू कर रहा है। वास्तव में पिछले दो वर्षों में, ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के माध्यम से लघु वनोपजों (एमएफपी) के विपणन के तंत्र और लघु वनोपजों (एमएफपी) के लिए मूल्य श्रृंखला के विकास’ ने जनजातीय इकोसिस्टम को खासा प्रभावित किया है। वन धन शब्द प्रधानमंत्री द्वारा 14 अप्रैल 2019 को बीजापुर, छत्तीसगढ़ में इस योजना का उद्घाटन करते समय गढ़ा गया था। इसी योजना के एक घटक के तौर पर, यह वन आधारित जनजातियों के लिए स्थायी आजीविका के सृजन की सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से वन धन केंद्रों की स्थापना करके लघु वनोपजों के मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और विपणन का एक कार्यक्रम है। यह जनजातीय संग्रह कर्ताओं और वनवासियों और घर में रहने वाले जनजातीय कारीगरों के लिए रोजगार सृजन के एक स्रोत के रूप में उभरा है। 27 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में 9.27 लाख लाभार्थियों को कवर करते हुए 3110 वीडीवीके क्लस्टरों में सम्मिलित 52976 वन धन स्वयं सहायता समूहों की स्थापना की गई है। इन समूहों का प्रशिक्षण पूरा हो गया है और आईआईटी, टीआईएसएस आदि जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से “जनजातीयलोगों के लिए तकनीक” (टेकफॉरट्राइबल) कार्यक्रम के माध्यम से 36925 लाभार्थियों का उन्नत स्तर का प्रशिक्षण जारी है। सभी सक्रिय समूहों ने लघु वनोपजों (एमएफपी) की खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें से लगभग 1600 समूहों ने मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण से जुड़ी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनकी सफलता की कई कहानियां सामने आई हैं और 1500 लाख रुपये से अधिक की बिक्री हुई है। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ के जगदलपुर (बस्तर) और महाराष्ट्र के रायगढ़ में लघु वनोपजों के प्रसंस्करण की दो वृहद परियोजनाएं निर्माण के अंतिम चरण में हैं। इस मिशन के तहत उद्यम का दृष्टिकोण बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्था को संभव बनाएगा, गैर सरकारी संगठनों की भागीदारी के साथ जनजातीय उद्यमिता को बढ़ावा देने में मदद करेगा और सभी मौजूदा निधियों एवं संसाधनों का लाभ उठाते हुए जनजातीय स्वामित्व वाली और जनजातीय लोगों द्वारा प्रबंधित उत्पादन इकाइयों का निर्माण करेगा।

इन सफलताओं और गतिविधियों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए, जनजातीय लोगों की आजीविका के विकास और उद्यमों को बढ़ावा देने पर ध्यान देने वाली एक पहल की परिकल्पना की गई है। इन वीडीएसएचजी/वीडीवीकेसी को स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों और कौशल के आधारित जनजातीय लोगों के स्थायी उद्यमों के रूप में पोषित और विकसित किया जाएगा।

इस मिशन की गतिविधियों को अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों के लिए देशभर में लागू किया जाएगा और यह वन धन कार्यक्रम एवं एमएफपी के लिए एमएसपी योजना के तहत सभी 27 राज्यों और 308 जनजातीय बहुल जिलों को कवर करते हुए निरंतर जारी रहने वाला एक कदम है। इस पहल से एक मिलियन जनजातीय परिवारों को सक्रिय रोजगार एवं आजीविका मिलने की उम्मीद है ताकि वे बिना किसी विस्थापन या प्रवास की जरूरत के वन संसाधनों और इससे जुड़ी गतिविधियों का लाभ उठाकर उन उत्पादक आर्थिक गतिविधियों में संलग्न हो सकें जिनसे वे पहले से परिचित हैं।

जनजातीय लोगों के लिए साल भर आय पैदा करने के अवसर सुनिश्चित करने और बिना किसी अधिकार के भूमि/घर का कब्जा; लघु वनोपज के संग्रहण में प्रतिबंध; बिचौलियों द्वारा शोषण, विस्थापन, इस मिशन मोड में वन गांवों में विकास की कमी, आदि जैसे उनके सामने आने वाली विकट समस्याओं को दूर करने पर ध्यान देने के साथ-साथ जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा जनजातीय लोगों के सशक्तिकरण के अगले चरण की शुरुआत किए जाने की उम्मीद है।

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