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भारत-मिस्र 12 बिलियन अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य को पांच वर्षों के भीतर हासिल करने का इरादा

भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. श्रीकर के. रेड्डी के नेतृत्व में पांच-सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मिस्र में भारत के राजदूत महामहिम अजीत गुप्ते के साथ 26 जुलाई 2022 को काहिरा में मिस्र अरब गणराज्य की व्यापार एवं उद्योग मंत्री महामहिम नेविन गामिया से मुलाकात की। माननीय मंत्री जी की उपस्थिति में दोनों पक्षों द्वारा 25 जुलाई 2022 को आयोजित भारत-मिस्र संयुक्त व्यापार समिति (जेटीसी) के पांचवें सत्र के सहमत मिनट्स पर हस्ताक्षर किए गए।

इस जेटीसी की सह-अध्यक्षता प्रथम अवर सचिव एवं मिस्र के वाणिज्यिक सेवा (ईसीएस) के प्रमुख याह्या एल वाथिक बेल्लाह और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. श्रीकर के. रेड्डी ने की। मिस्र में भारत के राजदूत महामहिम अजीत गुप्ते और भारत एवं मिस्र की संबंधित सरकारी एजेंसियों के अधिकारियों ने भी इस जेटीसी में भाग लिया। पांचवां भारत-मिस्र जेटीसी, भारत और मिस्र के बीच व्यापार एवं निवेश संबंधों में आई मजबूती की पृष्ठभूमि में संपन्न हुआ। वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान द्विपक्षीय व्यापार 7.26 बिलियन अमेरिकी डॉलर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया जोकि वित्तीय वर्ष 2020-21 की तुलना में 75 प्रतिशत की वृद्धि है। 3.15 बिलियन अमरीकी डालर के मौजूदा भारतीय निवेश के साथ मिस्र इस भूभाग में भारत के लिए सबसे बड़े निवेश स्थलों में से एक है। भारतीय कंपनियां मिस्र में कई परियोजनाओं को कार्यान्वित कर रही हैं।

दोनों पक्षों ने व्यापार एवं निवेश संबंधों में हाल की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की और यह पाया कि ये संबंध हालांकि पहले से ही उत्कृष्ट हैं लेकिन इनमें और भी आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। इसके लिए, दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार के साथ-साथ पारस्परिक रूप से लाभप्रद निवेश को बढ़ाने हेतु ध्यान देने लायक विभिन्न क्षेत्रों की पहचान की। इनमें खाद्य, कृषि एवं समुद्री उत्पाद, ऊर्जा विशेष रूप से हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया समेत नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं फार्मास्यूटिकल्स, रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स, एमएसएमई, इंजीनियरिंग सामान, विनिर्माण, आईटी और आईटी समर्थ सेवाएं, पर्यटन, आदि शामिल हैं। दोनों पक्षों ने मानकों, आईटी और परिवहन के क्षेत्र में समझौता ज्ञापन (एमओयू) के लिए चल रही वार्ताओं की प्रगति की भी समीक्षा की और उन्हें तेजी से पूरा करने पर सहमत हुए।

व्यापार एवं निवेश संबंधों में विविधता लाने तथा उसका विस्तार करने की आपसी इच्छा की पुष्टि करते हुए, दोनों पक्षों ने पांच वर्षों के भीतर प्राप्त करने के लिए 12 बिलियन अमेरिकी डॉलर का वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य निर्धारित किया। व्यापार में तेजी लाने के लिए, दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार में बाधा डालने वाले सभी मुद्दों का शीघ्र समाधान करने; दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने; और द्विपक्षीय संस्थागत सहयोग को और अधिक मजबूत करने हेतु द्विपक्षीय फोकस बिंदुओं की पहचान करने पर सहमत हुए। दोनों पक्षों ने गैर-टैरिफ बाधाओं के समाधान से संबंधित वार्ता में प्रगति की और मिस्र पक्ष कुछ भारतीय कृषि उत्पादों के मिस्र को निर्यात से संबंधित एनटीबी से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए अपने तकनीकी प्रतिनिधिमंडलों को भारत की यात्रा पर भेजने में तेजी लाने पर सहमत हुआ। इसके अलावा, फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में सहयोग के संदर्भ में, मिस्र पक्ष ने भारत में संबंधित एजेंसी के साथ तकनीकी चर्चा शुरू करने पर सहमति व्यक्त की ताकि भारत को फार्मास्यूटिकल्स उत्पादों के आयात के लिए मिस्र के अधिकारियों द्वारा स्वीकृत संदर्भ देशों की सूची में शामिल करने के प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जा सके।

26 जुलाई 2022 को संयुक्त व्यापार परिषद (जेबीसी) की पांचवीं बैठक फिक्की और मिस्र की वाणिज्यिक सेवाओं द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई थी। भारत से एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल वर्तमान में जेबीसी में भाग लेने और मिस्र के अपने समकक्षों के साथ बी2बी बातचीत करने के लिए मिस्र के दौरे पर है। भारत और मिस्र के प्रमुख व्यापारिक घरानों के प्रतिनिधियों सहित बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल और रुचि के क्षेत्रों से संबंधित प्रमुख व्यापारिक हस्तियों की उपस्थिति ने आर्थिक एवं व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने के प्रति दोनों देशों के व्यापारिक जगत के बीच जबरदस्त रुचि और उत्साह को प्रमाणित किया।

भारत-मिस्र जेटीसी और जेबीसी के पांचवें सत्र के विचार-विमर्श सौहार्दपूर्ण और अग्रगामी थे, जोकि दोनों देशों के बीच के पारंपरिक रूप से मैत्रीपूर्ण और विशेष संबंधों को दर्शाते हैं। जेटीसी और जेबीसी की बैठकें सामयिक और उपयोगी थीं, जोकि महामारी के बाद के युग में दोनों पक्षों के व्यापारिक समुदायों के व्यापार और निवेश संबंधों को नवीनीकृत एवं मजबूत करने तथा उन्हें नई ऊंचाइयों पर ले जाने की एक साझी इच्छा को दर्शाती हैं।

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