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भारत की लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक (LPI) रैंकिंग में सुधार हेतु किए गए उपायों एवं कार्य योजना के संबंध में 11 हितधारक मंत्रालयों/विभागों की बैठक

भारत की लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक (एलपीआई) रैंकिंग में सुधार हेतु किए गए उपायों और कार्य योजना के संबंध में विशेष सचिव (लॉजिस्टिक्स), डीपीआईआईटी, एमओसीआई की अध्यक्षता में ग्यारह हितधारक मंत्रालयों/विभागों में गठित एलपीआई समर्पित प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारियों के साथ एक बैठक शुक्रवार को संपन्न हुई।

इस समर्पित प्रकोष्ठ की बैठक हर पखवाड़े एलपीआई के छह मापदंडों पर प्रदर्शन में सुधार की दिशा में किए गए उपायों और हासिल परिणामों का आकलन करने हेतु होती है। एलपीआई के मापदंडों में (i) सीमा शुल्क, (ii) बुनियादी ढांचा (iii) खेपों (शिपमेंट) की व्यवस्था में आसानी (iv) लॉजिस्टिक्स सेवाओं की गुणवत्ता (v) निगरानी (ट्रैकिंग) और खोजबीन (ट्रेसिंग) और (vi) समयबद्धता शामिल हैं।

श्रीमती सुमिता दावरा, विशेष सचिव (लॉजिस्टिक्स) डीपीआईआईटी ने अपनी प्रारंभिक टिप्पणी के दौरान इस बात पर प्रकाश डाला कि लक्षित कार्य योजना देश की लॉजिस्टिक्स संबंधी दक्षता को बेहतर करने और इस तरह विश्व बैंक की एलपीआई रैंकिंग में भारत की स्थिति में सुधार करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हितधारक मंत्रालयों/विभागों द्वारा किए गए उपायों को विश्व बैंक एलपीआई टीम के सामने प्रदर्शित किया जाएगा।

बैठक के दौरान, विभिन्न मंत्रालयों/विभागों ने कार्य योजना प्रस्तुत की और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का प्रदर्शन किया गया।

भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण (एलपीएआई) के सचिव श्री विवेक वर्मा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि एलपीएआई ने परिचालन को डिजिटल बनाने और एकीकृत चेक पोस्ट (आईसीपी) पर सभी हितधारकों के बीच सूचना के सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक प्रवाह की सुविधा हेतु एक भूमि पत्तन प्रबंधन प्रणाली (एलपीएमएस) लागू की है। यह प्रणाली सीमा पार आवाजाही (व्यापार और यात्री) के रुकने के समय को कम कर रही है, सीमा शुल्क और सीमा प्रबंधन निकासी की दक्षता बढ़ा रही है और खेपों (शिपमेंट) की समय पर डिलीवरी में सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि एलपीएआई रुकने के समय को 57 दिनों से घटाकर 24 घंटे से भी कम करने में सफल रहा है।

रेल मंत्रालय के ईडी (योजना) श्री मनोज गांगेय ने उन विभिन्न पहलों के बारे में बताया जिनकी रेल मंत्रालय एलपीआई के छह मापदंडों के आधार पर योजना बना रहा है। इसमें रेलवे पटरियों का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण, देश में माल परिवहन की गति एवं मात्रा में सुधार के लिए वित्त वर्ष 2024 में पूंजीगत व्यय को 2.6 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाना और पूर्वी एवं पश्चिमी समर्पित माल गलियारों के कार्यान्वयन से मालगाड़ियों की औसत गति में वृद्धि होने की संभावना शामिल है। इससे ग्राहकों के पारगमन समय और इन्वेंट्री लागत कम हो जायेगी। इसके अतिरिक्त, बंदरगाहों एवं माल ढुलाई टर्मिनलों पर रेल कंटेनरीकरण के विकास से वित्त वर्ष 2031 तक रेल कंटेनर लोडिंग पिछले साल दर्ज 80 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर तीन गुना होने की उम्मीद है। मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने हेतु रेल मंत्रालय भूमि पत्तनों पर रेलवे साइडिंग की व्यवहार्यता के बारे में भी पता लगा रहा है।

एएआईसीएलएएस के सीईओ श्री अजय कुमार ने हवाई अड्डे की क्षमता निर्माण पर प्रकाश डाला, जो दिसंबर 2025 तक एक उन्नत/नई सुविधा के निर्माण के लक्ष्य के साथ कोलकाता में किया जा रहा है। दिल्ली (जेवर हवाई अड्डे) स्थित लगभग 37 एकड़ क्षेत्र में फैले एक एयर कार्गो विलेज में भी 1200 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई जा रही है। इस कार्गो विलेज के दिसंबर 2024 तक चालू होने की संभावना है।

उप सचिव (पत्तन) श्री ऋतुराज मिश्रा ने लॉजिस्टिक्स संबंधी दक्षता में सुधार से संबंधित विभिन्न पहलों से जुड़ी योजनाओं को प्रस्तुत किया। उनमें से कुछ में वेटब्रिज का स्वचालन, बंदरगाहों पर स्कैनिंग सुविधाओं में सुधार, रेल द्वारा डीपीडी/डीपीई हिस्सेदारी को 80 प्रतिशत तक बढ़ाना और सभी बंदरगाहों पर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपीएस) बनाकर प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और सरल बनाना शामिल है।

सीबीआईसी के निदेशक श्री आर अनंत ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 23 दिसंबर तक गुवाहाटी में एक सीमा शुल्क राजस्व नियंत्रण प्रयोगशाला (सीआरसीएल) की शुरुआत की जाएगी, जो व्यापार की जाने वाली विभिन्न वस्तुओं के नमूनों के रासायनिक विश्लेषण में फील्ड फार्मेशन में सहायता करेगी।

अपने समापन संबोधन में, विशेष सचिव ने कहा कि लक्षित उपायों वाली इन पहलों से देश में लॉजिस्टिक संबंधी दक्षता में सुधार होगा। इसके अलावा, विभिन्न मंत्रालयों की अच्छी कार्यप्रणालियां एलपीआई गणना से संबंधित विश्व बैंक के उद्देश्य-आधारित मूल्यांकन के विचार को प्रभावित करने में मदद करेगी। इस संबंध में, उन्होंने सुझाव दिया कि:

सीबीआईसी, एमओसीए, एमओआरटीएच, एमओआर और एमओपीएसडब्ल्यू सहित विभिन्न मंत्रालय/विभाग उपयोगकर्ता मंत्रालयों (कोयला, इस्पात, डीजीएफटी) और एनआईसीडीसी के साथ समन्वय करते हुए एक समय-सीमा के अंतर्गत एक कार्य योजना के रूप में मंत्रालयों से संबंधित अंतराल/समस्याओं का समाधान करने हेतु योजनाबद्ध पहल, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और उपायों को साझा करें।

विभिन्न मंत्रालयों/विभागों की पहलों और अच्छी कार्यप्रणालियों को हितधारकों तक पहुंचाने हेतु एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है जिससे भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र से संबंधित धारणा में सुधार हो।

बैठक में उपस्थित रहने वाले ग्यारह हितधारक मंत्रालयों/विभागों में भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण (एलपीएआई), नागरिक विमानन मंत्रालय, रेलवे मंत्रालय, पोत, पत्तन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू), कोयला मंत्रालय, नागरिक विमानन मंत्रालय (एमओसीए), सीबीआईसी, इस्पात मंत्रालय, और वाणिज्य विभाग, विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) तथा राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम लिमिटेड (एनआईसीडीसी) शामिल थे।

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