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भारत की ‘बायो-इकोनॉमी’ पिछले आठ वर्षों में आठ गुना बढ़कर 10 बिलियन डॉलर से 80 बिलियन डॉलर हो गई है: डॉ. मनसुख मांडविया

“भारत की ‘बायो इकोनॉमी’ पिछले आठ वर्षों में आठ गुना बढ़कर 10 बिलियन डॉलर से बढ़कर 80 बिलियन डॉलर हो गई है। भविष्य में जैव-प्रौद्योगिकी स्वास्थ्य उपचार का सबसे बड़ा आधार बनेगी।” केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज गुजरात के अहमदाबाद में 10वें वाइब्रेंट गुजरात वैश्विक शिखर सम्मेलन से पूर्व आयोजित सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित करते हुए यह बात कही। बाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन जनवरी 2024 में गुजरात के गांधीनगर में आयोजित किया जाएगा। इसका विषय ‘गेटवे टू द फ्यूचर’ होगा।

डॉ. मांडविया ने कहा कि भारतीय जैव प्रौद्योगिकी उद्योग का लक्ष्य 2025 तक 150 बिलियन डॉलर और 2030 तक 300 बिलियन डॉलर तक वृद्धि का है। वर्तमान में वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी उद्योग में भारत की हिस्सेदारी लगभग 3 प्रतिशत की है और विश्व में शीर्ष 12 गंतव्यों में से एक है। उन्होंने कहा, “यह उद्योग कृषि, पर्यावरण, औद्योगिक उत्पादन और कई अन्य क्षेत्रों में जटिल समस्याओं के समाधान खोजने का माध्यम बन जाएगा और भविष्य में अर्थव्यवस्था जैव प्रौद्योगिकी आधारित हो जाएगी।” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप डॉ. मांडविया ने कहा, “वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में, भारत जल्द ही शीर्ष दस देशों में से एक होगा।” 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र का दर्जा प्राप्त करने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को दोहराते हुए, डॉ. मांडविया ने कहा कि भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने में इस क्षेत्र का योगदान महत्वपूर्ण होगा।

जैव प्रौद्योगिकी उद्योग की उन्नति और सामर्थ्य पर डॉ. मांडविया ने कहा कि महामारी के दौरान भारत द्वारा किए गए टीकाकरण ने दुनिया के समक्ष जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत के सामर्थ्य को प्रदर्शित किया। इस क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा, “राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी विकास रणनीति 2020-25 सरकार को ज्ञान साझा करने के लिए कौशल विकास, संसाधन और नवाचार को एक सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तित करने के लिए एक मंच प्रदान करती है।” उन्होंने कहा कि यह इन क्षेत्रों में निजी-सार्वजनिक भागीदारी मॉडल को प्रोत्साहित करके व्यावसायीकरण और बाजार से जुड़ने की सुविधा प्रदान करती है।

इस क्षेत्र में राष्ट्र और उद्योग की प्रगति की सराहना करते हुए डॉ. मांडविया ने जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विकास में योगदान के लिए देश भर के स्टार्टअप, उद्योगों, उद्योग संघों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों की भागीदारी की सराहना की। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने दो दशकों में जैव प्रौद्योगिकी पर समर्पित गुजरात के प्रयासों और योगदान की सराहना की और भारत को स्वास्थ्य देखभाल और नवाचार के लिए तैयार देश बनाने में इसके सुदृढ़ योगदान की सराहना की। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गुजरात 15-20 साल पहले बायोटेक मिशन स्थापित करने वाला देश का पहला राज्य था। डॉ। मांडविया ने स्मरण दिलाया कि जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने राज्य में बायोटेक मिशन और बायोटेक पार्क की स्थापना की थी।

राष्ट्र और अर्थव्यवस्था में जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार करते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र भाई पटेल ने कहा, “‘गेटवे टू द फ्यूचर’ की थीम के साथ तालमेल बिठाते हुए हम भविष्य के क्षेत्रों पर अतिरिक्त ध्यान केंद्रित करेंगे जिनमें जैव प्रौद्योगिकी सर्वधिक महत्वपूर्ण है।” उन्होंने कहा कि “जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र को आशाओं के क्षेत्र के रूप में स्वीकार किया जाता है। यह विश्व में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करेगा।” उन्होंने स्टार्टअप उत्पाद का भी उद्घाटन किया।

इस कार्यक्रम में गुजरात सरकार के मुख्य सचिव राज कुमार, गुजरात के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की प्रमुख सचिव मोना खंधार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश गोखले, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, मिशन निदेशक, और प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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