भारत और रूस के बीच पहली टू प्लस टू मंत्रिस्तरीय शिखर बैठक नई दिल्ली में चल रही है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और विदेशमंत्री डॉ. एस0 जयशंकर टू प्लस टू वार्ता में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जबकि रूस का प्रतिनिधित्व वहां के विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री कर रहे हैं।
अपने सम्बोधन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों देशों के आपसी संबंधों का आज ऐतिहासिक दिन है। उन्होंने कहा कि हाल के कुछ वर्षों में भारत-रूस रक्षा सहयोग में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि रूस, भारत का प्रमुख साझेदार बना रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत की विकास जरूरतें बहुत बड़ी हैं और इसकी रक्षा चुनौतियां उचित, वास्तविक और तात्कालिक हैं। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे भागीदारों की तलाश है जो इसकी अपेक्षाओं और आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील और उत्तरदायी हों।
डॉ0 जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया में बहुत बदलाव हुए हैं और भारत-रूस संबंध इस कसौटी पर खरे उतरे हैं। उन्होंने कहा कि वार्ता आपसी हित के राजनीतिक तथा सैन्य मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक उपयुक्त मंच है। आतंकवाद, अफगानिस्तान की स्थिति, समुद्री सुरक्षा और आसियान सहित मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।
इससे पहले आज विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ के साथ बैठक की। इस अवसर पर डॉ जयशंकर ने कहा कि सर्गेई लावरोफ के साथ इस साल उनकी यह चौथी मुलाकात है। उन्होंने कहा कि यह भारत और रूस के बीच विशेषाधिकार प्राप्त कूटनीतिक साझेदारी का प्रतीक है।
इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु के साथ बैठक की। दोनों देशों ने छोटे हथियारों और सैन्य सहयोग से संबंधित कई समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए। राजनाथ सिंह ने भारत को समर्थन देने के लिए रूस की सराहना की और आशा व्यक्त की कि द्विपक्षीय सहयोग पूरे क्षेत्र में शांति, समृद्धि और स्थिरता लाएगा।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी भारत के दौरे पर आज नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ 21वीं
भारत-रूस वार्षिक शिखर बैठक में हिस्सा लेंगे। दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति और संभावनाओं की समीक्षा करेंगे तथा दोनों देशों के बीच रणनीतिक भागीदारी को और मजबूत बनाने के उपायों पर विचार विमर्श करेंगे। बैठक में क्षेत्रीय, बहुपक्षीय और आपसी हित के अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान होगा। दोनों नेता व्यक्तिगत तौर पर भी बातचीत करेंगे।
भारत और रूस के बीच वार्षिक शिखर बैठक दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के लिए सर्वोच्च संस्थागत वार्ता मंच है। दोनों देशों के बीच अब तक ऐसी बीस बैठकें हो चुकी हैं। दोनों देश बारी-बारी से अपने यहां बैठक आयोजित करते हैं।
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