भारतीय तट रक्षक अपतटीय गश्ती जहाज (ओपीवी) आईसीजीएस वराह को पूर्वी अफ्रीका में चल रही रणनीतिक विदेशी तैनाती के एक हिस्से के तहत 14 फरवरी, 2024 को मोजाम्बिक के मापुटो पत्तन पर एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में तैनात किया गया। यह मौजूदा राजनयिक सामुद्रिक जुड़ाव के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
अपनी इस तीन दिवसीय यात्रा के दौरान आईसीजीएस वराह की टीम समुद्री प्रदूषण प्रतिक्रिया (एमपीआर), समुद्री खोज व बचाव (एम-एसएआर) और सामुद्रिक कानून प्रवर्तन के क्षेत्र में पेशेवर वार्ता की एक श्रृंखला में हिस्सा लेगी। इनमें क्रॉस-डेक प्रशिक्षण, विभिन्न मोजाम्बिक नौसेना व समुद्री एजेंसियों के अधिकारियों से मुलाकात, खेल कार्यक्रम, संयुक्त योग सत्र, टेबलटॉप अभ्यास और मोज़ाम्बिक नौसेना बलों के साथ पैसेज एक्सरसाइज (पैसेक्स) शामिल है। इसके साथ ही पूर्वी अफ्रीकी देशों में स्वदेश निर्मित अपतटीय गश्ती जहाज आईसीजीएस वराह की इस यात्रा का उद्देश्य “आत्मनिर्भर भारत” की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए भारतीय पोत निर्माण उद्योग की शक्ति और क्षमताओं का प्रदर्शन करना भी है।
इसके अलावा राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) का एक दल आईसीजी पोत पर सवार है और यह सरकार की पहल “पुनीत सागर अभियान” को अंतरराष्ट्रीय पहुंच प्रदान करने के लिए मापुटो में एक स्थानीय युवा संगठन के साथ समुद्र तट स्वच्छता अभियान संचालित करेगा। इन सहयोगात्मक प्रयासों का उद्देश्य भारतीय तटरक्षक बल व मोजाम्बिक में उनके समकक्षों के बीच संबंधों को और अधिक मजबूत करना है।
यह विदेशी तैनाती द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने और विदेशी मित्र देशों (एफएफसी) के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की भारतीय तटरक्षक की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। उल्लेखनीय है कि इस यात्रा से पहले आईसीजीएस वराह ने अफ्रीकी क्षेत्र में केन्या के मोम्बासा पत्तन पर तैनात होकर राजनयिक सामुद्रिक गतिविधियों की निर्बाध निरंतरता का प्रदर्शन किया था। मापुटो की यह यात्रा काफी महत्व रखती है क्योंकि, यह प्रमुख समुद्री एजेंसियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करती है। ये दीर्घकालिक संबंधों के क्षेत्र में समुद्र की सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने के साथ-साथ समकालीन सामुद्रिक चुनौतियों के समाधान करने को लेकर भी एक अभिन्न हिस्से हैं।
पूर्वी अफ्रीका में आईसीजीएस वराह की तैनाती अफ्रीकी देशों के साथ करीबी और सौहार्दपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता का उदाहरण है। इसका व्यापक लक्ष्य सामुद्रिक सहयोग के माध्यम से मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देना है, जो “सागर- क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा व विकास” और “वैश्विक दक्षिण” की अवधारणा में शामिल भारत की सामुद्रिक सोच के अनुरूप है।
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