प्रधानमंत्री ने छोटे कस्बे और गांव से आने वाले खिलाडि़यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि तोक्यो ओलम्पिक के लिए टीम में ऐसे अनेक खिलाड़ी शामिल हैं जिनका जीवन बहुत प्रेरित करता है। प्रधानमंत्री ने प्रवीण जाधव का जिक्र किया जो महाराष्ट्र के सतारा जिले के गांव में रहते हैं। वे बेहतरीन तीरंदाज हैं। उनके पिता मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करते हैं और बेटा ओलम्पिक में भाग लेने जा रहा है। प्रधानमंत्री ने तोक्यो के लिए महिला हॉकी टीम की सदस्य नेहा गोयल का भी जिक्र किया। नेहा की मां और बहन साइकिल फैक्ट्री में काम करके घर चलाती हैं। प्रधानमंत्री ने दीपिका कुमारी की भी बात की जिनका जीवन सफर उतार-चढ़ाव वाला रहा है। दीपिका के पिता ऑटो रिक्शा चलाते हैं और उनकी मां नर्स है। दीपिका भारत की एकमात्र महिला तीरंदाज हैं जो तोक्यो ओलम्पिक में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि तोक्यो ओलम्पिक के लिए चुने गये खिलाडि़यों ने बचपन में साधनों और संसाधनों की कमी का सामना किया लेकिन वो डटे रहे और जुटे रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की प्रियंका गोस्वामी का उदाहरण दिया। प्रियंका के पिता बस कंडक्टर हैं। बचपन में प्रियंका को वह बैग बहुत पसंद था जो मैडल विजेता खिलाडि़यों को मिलता है। इसी आकर्षण में उन्होंने पहली बार पैदल चाल स्पर्धा में हिस्सा लिया। आज वो इस खेल की चैम्पियन हैं।
प्रधानमंत्री ने भाला फेंक स्पर्धा के खिलाड़ी शिवपाल सिंह का भी उल्लेख किया, जो बनारस के हैं। शिवपाल का पूरा परिवार ही इस खेल से जुड़ा है। उनके पिता, चाचा और भाई सभी भाला फेंकने में एक्सपर्ट हैं।
प्रधानमंत्री ने तोक्यो ओलम्पिक के लिए चुने गये चिराग शेट्टी और उनके सहयोगी सात्विक साइराज का भी उदाहरण दिया। चिराग के नाना का हाल की में कोविड के कारण निधन हो गया। सात्विक को भी पिछले साल कोविड हो गया था। इन मुश्किलों के बावजूद दोनों खिलाड़ी पुरुष युगल बैडमिंटन स्पर्धा में सर्वश्रेष्ठ देने की तैयारी कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने हरियाणा में भिवानी के मनीष कौशिक का भी जिक्र किया। मनीष किसान के बेटे हैं। बचपन में खेतों में काम करते करते मनीष को मुक्केबाजी के प्रति रूचि हो गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसी के कारण वो तोक्यो ओलम्पिक में खेलने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने सी. ए. भवानी देवी का भी नाम लिया जो तलवारबाजी में निपुण हैं। चेन्नई की भवानी ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भवानी का प्रशिक्षण जारी रखने के लिए उनकी मां ने अपने गहने तक गिरवी रख दिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तोक्यो जा रहे प्रत्येक खिलाड़ी ने संघर्ष किया और वर्षों तक मेहनत की। उन्होंने कहा कि ये खिलाड़ी अपने लिए नहीं बल्कि देश के लिए खेलने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों को सलाह दी कि जाने अनजाने में भी इन खिलाडि़यों पर दबाव नहीं बनाना है बल्कि खुले मन से इनका साथ देना है और उत्साह बढ़ाना है। प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि सोशल मीडिया पर हैश टैग चीयर फॉर इंडिया के साथ इन खिलाडि़यों को शुभकामनाएं दें।
प्रधानमंत्री ने महान धावक मिल्खा सिंह का भी उल्लेख किया, जिनका कोविड के कारण निधन हो गया। जब मिल्खा सिंह अस्पताल में भर्ती थे तो प्रधानमंत्री ने उनसे आग्रह किया था कि तोक्यो ओलम्पिक में भाग लेने वाले खिलाडि़यों का हौसला बढ़ायें, लेकिन दुर्भाग्य से नियति को कुछ और ही मंजूर था। प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से माई गॉव प्लेटफॉर्म पर ओलम्पिक पर आधारित प्रतियोगिता तोक्यो क्विज में भाग लेने और पुरस्कार जीतने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस प्रतियोगिता में कई दिलचस्प प्रश्न मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि तोक्यो क्विज में भाग लेने से लोगों को ओलम्पिक में भारत के खिलाडि़यों की अब तक की उपलब्धि को जानने और तोक्यो ओलम्पिक के लिए हमारे खिलाडि़यों की तैयारियों के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।
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