प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने और केन्द्र शासित प्रदेश को निर्वाचित सरकार प्रदान करने के लिए विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन का काम तेजी से पूरा करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लोकप्रिय सरकार के गठन से विकास को बल मिलेगा।
कल नई दिल्ली में जम्मू कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की उच्चस्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केन्द्र शासित प्रदेश में बुनियादी स्तर पर लोकतंत्र को सुदृढ़ करना है। प्रधानमंत्री ने सभी नेताओं से अपील की कि वे क्षेत्र की प्रगति और युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए मिलकर काम करें।
बैठक के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किये जाने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया और शांतिपूर्ण मतदान महत्वपूर्ण है। गृहमंत्री ने कहा कि केन्द्र शासित प्रदेश में लोगों के लाभ के लिए चलाये जा रहे केन्द्रीय कार्यक्रमों का 90 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है और कई प्रमुख सडक परियोजनाओं दो नये अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान-एम्स, सात नये मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं।
केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि यह बैठक जम्मू-कश्मीर के विकास और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
डीलिमिटेशन की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करना होगा ताकि हर क्षेत्र, हर वर्ग को प्राप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व विधानसभा में प्राप्त हो सके। विशेष रूप से दलितों, पिछड़ों, जनजातीय क्षेत्रों के साथियों को एक उचित प्रतिनिधित्व देना आवश्यक है। बैठक में प्रधानमंत्री जी ने इस बात पर भी जोर दिया कि जम्मू-कश्मीर को शांति और समृद्धि के पथ पर ले जाने के लिए ऐसे ही सभी स्टेक होल्डर्स को मिलकर साथ चलना होगा। यह बैठक जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र को मजबूती देने और जम्मू-कश्मीर के विकास और समृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
बैठक में जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र को मजबूत बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। विभिन्न दलों के राजनेताओं ने संविधान और लोकतंत्र को मजबूत बनाने के प्रति बचनबद्धता भी व्यक्त की।
नेशनल कांफ्रेंस के नेताओं फारूख अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला, पी.डी.पी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, भारतीय जनतापार्टी के नेता रवीन्द्र रैना और निर्मल सिंह, पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता सज्जाद लोन और अन्य नेताओं ने हिस्सा लिया।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।
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