प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत में पिछले 10 वर्ष के दौरान तीस लाख हेक्टेयर से अधिक वनक्षेत्र की बढोतरी हुई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मरुस्थलीकरण, भूमि की उर्वरा शक्ति कम होने और सूखे पर संयुक्त राष्ट्र उच्चस्तरीय संवाद को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे।
मरूस्थलीकरण की समस्या से निपटने की संयुक्त राष्ट्र संधि में शामिल देशों के सम्मेलन के 14वें सत्र के अध्यक्ष के रूप में संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भू-क्षरण और उपजाऊ शक्ति कम होने की रोकथाम के लिए भारत द्वारा किए गए उपायों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में 2030 तक दो करोड़ 60 लाख हेक्टेयर जमीन की उपजाऊ शक्ति बहाल करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने हमेशा भूमि को महत्व दिया है और पावन धरती को मां का दर्जा दिया है।
उन्होंने गुजरात में कच्छ के रण में बानी क्षेत्र का उदाहरण दिया, जहां मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाकर उत्पादकता, खाद्य सुरक्षा और आजीविका बढ़ायी गयी है। बानी क्षेत्र में भूमि को उर्वरा बनाने काम घास लगाकर किया गया, जिससे जमीन की गुणवत्ता का क्षरण रोकने में मदद मिली। प्रधानमंत्री ने घरेलू तकनीक से जमीन को उपजाऊ बनाने की प्रभावी रणनीतियां बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भूमि जीवन और आजीविका का बुनियादी स्तंभ है। विश्व का दो-तिहाई हिस्सा जमीन की गुणवत्ता में कमी की समस्या से जूझ रहा रहा है। यदि इसकी रोकथाम नहीं की गई तो इससे जीवन की सुरक्षा और पूरी सामाजिक आर्थिक व्यवस्था को खतरा है।
दक्षिण-दक्षिण सहयोग की भावना से भारत प्रभावी रणनीतियां विकसित करने में अन्य देशों की मदद कर रहा है। भारत में इस उद्देश्य से वैज्ञानिक उपायों के बढ़ावा देने के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जा रहा है।
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