उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) की विशेष सचिव (लॉजिस्टिक्स) सुमिता डावरा की अध्यक्षता में कल नई दिल्ली में नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (एनपीजी) की 59वीं बैठक हुई।
बैठक में, रेल मंत्रालय के उच्च यातायात घनत्व मार्गों (एचटीडीआर) पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में 16,600 किलोमीटर की कुल लंबाई के साथ उच्च यातायात घनत्व वाले मार्गों की क्षमता में वृद्धि, ट्रंक मार्गों को चार लेन का बनाना तथा उनका दोहरीकरण करना शामिल हैं। आशा है कि इससे नेटवर्क में भीड़ कम होगी और स्पीड बढ़ेगी। रेल मंत्रालय ने इस कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 200 परियोजनाओं को चिन्हित किया है।
बैठक में, देश में अवसंरचना की मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी बढ़ावा देने के लिए परिवहन के अन्य साधनों के साथ रेलवे को एकीकृत करने के पहलू पर चर्चा की गई। कार्यक्रम के महत्व को एनपीजी सदस्यों द्वारा संभावित रोजगार सृजन और भारतीय लॉजिस्टिक इकोसिस्टम के लिए समग्र महत्व के संदर्भ में स्वीकार किया गया था। औद्योगिक क्षेत्र को एक स्थायी परिवहन विकल्प प्रदान करने की इसकी क्षमता को भी स्वीकार किया गया था।
यह कार्यक्रम वांछित वृद्धिशील नेटवर्क क्षमता बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके परिणामस्वरूप भीड़ कम होगी, रेलवे मार्गों पर अतिरिक्त ट्रेनों को चलाने की क्षमता पैदा होगी और औसत गति में सुधार होगा। क्षेत्र विकास दृष्टिकोण के अप्लीकेशन से सतत तरीके से सामाजिक-आर्थिक विकास को उत्प्रेरित करने के लिए पर्याप्त अवसंरचना का निर्माण होगा तथा प्रारंभ और अंतिम मील कनेक्टिविटी बढ़ेगी। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि एचटीडीआर परियोजना मार्ग में 210 जिलों के 6000 से अधिक गांवों को कवर करेगी।
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग की विशेष सचिव ने देश में रेलवे के आधुनिकीकरण के महत्व को स्वीकार किया ताकि इसे भविष्य के लिए तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि ऑटोमेटेड सिग्नलिंग, यार्ड-रीमॉडलिंग, टर्मिनल उन्नयन तथा बाधाओं को दूर करने जैसे उपाय करके भारतीय रेलवे अपनी क्षमता में काफी वृद्धि कर सकती है। इसके अतिरिक्त, यह वर्तमान नेटवर्क को कम करेगा, जिससे तेजी से कार्गो और यात्री आवाजाही होगी।
प्रधानमंत्री गतिशक्ति एनएमपी पोर्टल का संभावित उपयोग मल्टीमॉडल परियोजनाओं की योजना बनाने, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (भारतमाला 2047) और पोत परिवहन तथा जलमार्ग मंत्रालय (सागरमाला 2030) की योजनाओं और दृष्टिकोण के साथ एकीकरण करने के साथ-साथ मल्टीमॉडल हब की स्थापना और सामाजिक अवसंरचना की कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक लागत को कम करने तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतीक है। यह शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने के भारत के उद्देश्य के अनुरूप है।
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