केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और आवास एवं शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आज यहाँ नई दिल्ली में इंडियन ऑयल के खुदरा विक्रय केन्द्रों (रिटेल आउटलेट) मेसर्स इरविन रोड सर्विस स्टेशन में एक क्रांतिकारी ऑटोमोटिव ईंधन ‘इथेनॉल 100’ जारी (लॉन्च) किया। आज से, उपभोक्ता पांच राज्यों – महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, नई दिल्ली और तमिलनाडु में चुनिंदा 183 खुदरा विक्रय केन्द्रों पर इथेनॉल 100 का लाभ उठा सकते हैं।
पंकज जैन, सचिव, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में सचिव पंकज जैन; इंडियन ऑयल कारपोरेशन के अध्यक्ष श्रीकांत माधव वैद्य, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएंड एनजी) के वरिष्ठ अधिकारी, एवं इंडियन ऑयल के कार्यात्मक निदेशकों ने भी इस समारोह में भाग लिया।
इस अग्रणी ईंधन को बिक्री के लिए जारी (लॉन्च) करते हुए, हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इथेनॉल 100 की शुरुआत भारत के प्रधानमंत्री के अन्नदाताओं को ऊर्जादाता में बदलने की दूरदृष्टि से प्रेरित है। इसे एक क्रांतिकारी ईंधन बताते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि इथेनॉल 100 ईंधन में हमारे परिवहन क्षेत्र को बदलने और जीवाश्म ईंधन पर हमारी निर्भरता को कम करने की क्षमता है।
“यह आयात निर्भरता को कम करने, विदेशी मुद्रा के संरक्षण और कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। 2023 में ई 20 (20% इथेनॉल मिश्रित ईंधन) पर प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद से, ई 20 की उपलब्धता एक वर्ष के भीतर 12,000 विक्रय केन्द्रों (आउटलेट्स) तक बढ़ गई है और अब, इंडियन ऑइल के 183 आउटलेट्स पर इथेनॉल (ईटीएचएएनओएल) 100 की उपलब्धता के साथ हम अपने वर्ष 2025- 26 तक 20% इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य की प्राप्ति के बहुत पास हैं। पिछले 10 वर्षों के दौरान इन इथेनॉल मिश्रण पहलों से किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार में वृद्धि हुई है और 1.75 करोड़ वृक्ष लगाने के बराबर कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन में कमी आई है और इसके परिणामस्वरूप 85,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की भी बचत हुई है।”
2025-26 तक पेट्रोल में इथेनॉल के 20% मिश्रण तक पहुंचने के प्रधानमंत्री के स्वप्न को साकार करने की दिशा में देश द्वारा की गई प्रगति के बारे में बताते हुए हरदीप एस पुरी ने कहा कि तेल विपणन कंपनियां (ऑइल मार्केटिंग कम्पनीज –ओएमसीएस) देशभर में पेट्रोल के साथ इथेनॉल के विभिन्न मिश्रणों को प्रस्तुत करके इस प्रयास में सबसे आगे रही हैं। उन्होंने कहा कि ओएमसीएस ने 131 समर्पित इथेनॉल संयंत्रों के साथ दीर्घकालिक उठाव (ऑफटेक) समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इन संयंत्रों से 745 करोड़ लीटर की वार्षिक उत्पादन डिजाइन क्षमता जुड़ने की सम्भावना है। उन्होंने कहा कि तेल विपणन कंपनियां (ओएमसीएस) ने उच्च मिश्रण प्रतिशत (हायर ब्लेंडिंग परसेंटेज) को संभालने के लिए भंडारण क्षमता और संबद्ध बुनियादी ढांचे को बढ़ाने में भी निवेश किया है।
इस अवसर पर, एमओपीएनजी के सचिव पंकज जैन ने कहा कि “यह पहल टिकाऊ प्रौद्योगिकियों को अपनाने की दिशा में एक ऐसे महत्वपूर्ण बदलाव को रेखांकित करती है, जिससे निर्माताओं में इथेनॉल-आधारित वाहनों में निवेश करने का विश्वास पैदा होता है। उच्च क्षमता वाले वाहनों का वैकल्पिक ईंधन की ओर परिवर्तन हमारी इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। इसके अलावा, हमारे सुदृढ़ इथेनॉल उद्योग द्वारा समर्थित इथेनॉल की निरंतर आपूर्ति, इसकी उपलब्धता पर चिंताओं को दूर करती है। यह कदम कार्बन में कमी लाने (डीकार्बोनाइजेशन) के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की भी पुष्टि करता है। मैं इस पहल का नेतृत्व करने के लिए इंडियन ऑयल को अपनी ओर से बधाई देता हूं। उनका समर्थन हमारे ऊर्जा परिदृश्य में इथेनॉल और फ्लेक्स ईंधन के स्थायित्व को दर्शाता है।
जन सभा को संबोधित करते हुए इंडियन ऑयल के अध्यक्ष श्रीकांत माधव वैद्य ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत विश्व के उन कुछ देशों में से एक है जिसके पास इथेनॉल 100 ईंधन है। उन्होंने कहा की “यह स्थिरता और स्वच्छ गतिशीलता की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है”।
इथेनॉल 100 गैसोलीन के लिए एक ऐसे स्वच्छ, हरित विकल्प के रूप में आ गया है जो ग्रीनहाउस गैसों और प्रदूषकों के कम उत्सर्जन का दावा करता है और इस प्रकार जलवायु परिवर्तन से निपटने और हमारे समुदायों में वायु की गुणवत्ता को बढ़ाने में सहायता करता है। सामान्यतः 100-105 के बीच की अपनी उच्च-ऑक्टेन रेटिंग के साथ, सामान्यतः 100-105 के बीच, इथेनॉल (ईटीएचएएनओएल) 100 उच्च- कार्य क्षमता वाले इंजनों के लिए ऐसा आदर्श सिद्ध होता है, जो पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हुए बेहतर दक्षता और शक्ति उत्पादन सुनिश्चित करता है। इसके अलावा, इथेनॉल 100 की बहुविध उपयोगिता भी परिलक्षित होती है, क्योंकि इसका उपयोग वाहनों की एक विस्तृत श्रृंखला में किया जा सकता है, जिसमें गैसोलीन, इथेनॉल या दोनों के किसी भी मिश्रण पर चलने के लिए डिज़ाइन किए गए फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (एफएफवीएस) शामिल हैं, जो इसकी व्यावहारिकता और सही बुनियादी ढांचे के साथ एक मुख्यधारा का ईंधन विकल्प बनने की क्षमता को भी प्रदर्शित करता है।
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