भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की केंद्रीय सलाहकार समिति (सीएसी) ने आज तमिलनाडु के कोयंबटूर में 43वीं सीएसी बैठक के दौरान एंटी-माइक्रोबियल प्रतिरोध (एएमआर) पर प्राधिकरण की कार्य योजना का अनावरण किया।
बैठक के दौरान, एएमआर राष्ट्रीय कार्य योजना-II के तहत एफएसएसएआई की जिम्मेदारियों के हिस्से के रूप में पशुधन, जलीय कृषि, मुर्गीपालन आदि में एंटीबायोटिक दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग के बारे में किसानों के बीच जागरूकता पैदा करने पर विचार-विमर्श किया गया। उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्य मैट्रिक्स में रोगाणुरोधी संवेदनशीलता पर निगरानी रखने की योजना पर भी चर्चा की गई।
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को ‘स्वस्थ और स्वच्छ खाद्य सड़कों’ के रूप में विकसित की जाने वाली 100 खाद्य सड़कों के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में परिश्रमपूर्वक काम करने का निर्देश दिया गया।
चर्चा के दौरान सर्विलेंस सैंपलिंग के महत्व पर भी जोर दिया गया। राज्यों को अपनी सर्विलेंस योजनाएँ तैयार करने और राज्य प्रयोगशालाओं और उनके अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें आयोजित करने का निर्देश दिया गया।
युवा पीढ़ी को प्रोत्साहित करने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में ऐप-आधारित मॉडल और साहित्य के विकास के साथ-साथ राज्य और केंद्र सरकार के स्कूलों में स्वच्छ बाज़ार स्थानों और स्वास्थ्य क्लबों की स्थापना की आवश्यकता पर चर्चा की गई।
राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को फोर्टिफाइड चावल के महत्व और लाभों के बारे में जागरूकता पैदा करने के प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) के नियमित नमूने लेने और एफएसएस (खाद्य पदार्थों का फोर्टिफिकेशन) विनियमन, 2018 के अनुसार इसके सख्त अनुपालन पर भी जोर दिया गया।
बैठक के दौरान खाद्य सुरक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और छात्रावासों की कैंटीनों में खाद्य संचालकों के प्रशिक्षण के लिए एक गाइडेंस डॉक्युमेंट का भी अनावरण किया गया। इस पहल का लक्ष्य अगले दो वर्षों में विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और छात्रावासों की कैंटीनों में काम करने वाले लगभग 11 लाख खाद्य संचालकों को प्रशिक्षित करना है।
उमा शंकर ध्यानी, कार्यकारी निदेशक (मानव संसाधन एवं वित्त), एफएसएसएआई और इनोशी शर्मा, कार्यकारी निदेशक (अनुपालन रणनीति), एफएसएसएआई बैठक के दौरान उपस्थित थे। इसमें खाद्य सुरक्षा आयुक्तों (सीएफएस) सहित 50 से अधिक अधिकारियों,राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों, एफएसएसएआई और नोडल मंत्रालयों के अन्य अधिकारियों और खाद्य उद्योग, उपभोक्ताओं, कृषि, प्रयोगशालाओं और अनुसंधान निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों ने भी भाग लिया।
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