मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग ने राजकोट इंजीनियरिंग एसोसिएशन, राजकोट, गुजरात में आज सागर परिक्रमा कार्यक्रम पर पुस्तक और वीडियो विमोचन समारोह का आयोजन किया। केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री परषोत्तम रूपाला ने सागर परिक्रमा कार्यक्रम के लिये पुस्तक और वीडियो जारी करने के समारोह का उद्घाटन किया।
परषोत्तम रूपाला ने इस अवसर पर ‘सागर परिक्रमा’ यात्रा पर पुस्तक और वीडियो का अनावरण किया जो कि देश में मछुआरा समुदाय को सशक्त बनाने की दिशा में समूचे क्षेत्र को प्रेरित करेगा। पूर्व राज्यपाल वजूभाई वाला, लोकसभा सदस्य मोहनभाई कुंडारिया, राज्यसभा सदस्य रामभाई मोकारिया, मत्स्यपालन विभाग में सचिव डा. अभिलक्ष लिखि आनलाइन तरीके से, संयुक्त सचिव नीतू कुमारी प्रसाद, एनएफडीबी के मुख्य कार्यकारी डा. एल एन मूर्ति, मत्स्य पालन विभाग, गुजरात के निदेशक नरेन्द्र कुमार मीणा और स्वामी परमात्मानंद सरस्वती भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
केन्द्रीय मंत्री परषोत्तम रूपाला ने समारोह को संबोधित किया और 05.03.2022 को मांडवी, गुजरात से शुरू होकर 12 चरणों में 12 तटीय राज्यों/संघ शासित प्रदेशों से होकर 11.01.2024 को गंगासागर, पश्चिम बंगाल में संपन्न इस एतिहासिक यात्रा के अपने अनुभवों के बारे में बताया। केन्द्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में सागर परिक्रमा के दौरान कई बार कठिन समुद्री परिस्थितियों के कारण यात्रा की चुनौतियों का भी उल्लेख किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह एक प्रकार से चीजों का अनुभव करने का भी अवसर था, यह हमारे मछुआरों के समक्ष उनके रोजमर्रा के काम में आने वाली चुनौतियों और वास्तविक समस्याओं को समझने में महत्वपूर्ण रहा। सागर परिक्रमा के दौरान जो प्रतिक्रियायें, सुझाव और जमीनी अनुभव मिला वह क्षेत्र के लिये नीति और योजनाओं को बनाने तथा मछुआरा समुदाय की बेहतरी के लिये भारत सरकार द्वारा की जाने वाली पहलों के लिये बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा।
परषोत्तम रूपाला ने सागर परिक्रमा कार्यक्रम को सफल बनाने में मछुआरों, भारतीय तटरक्षकों, सभी तटीय राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों, समुद्री बोर्ड और अन्य सभी हितधारकों द्वारा दिये गये समर्थन का भी विशेषतौर से उल्लेख किया। केन्द्रीय मंत्री ने उस घटना को याद किया जब सागर परिक्रमा के दौरान वह रात को ओड़ीशा की चिलिका झील में फंस गये थे, उन्होंने इसके लिये उन मछुआरों का धन्यवाद किया जिन्होंने उन्हें और दूसरे अतिथियों का पता लगाकर सबको सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया। परषोत्तम रूपाला ने एक उदाहरण देते हुये यात्रा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जब महाराष्ट्र में राज्य के मुख्यमंत्री सागर परिक्रमा यात्रा में शामिल हुये तब उन्होंने मछली पकड़ने के जाल आग से नष्ट होने के कारण मछुआरों को हुये नुकसान में मदद के लिये तुरंत वित्तीय सहायता की घोषणा कर दी, क्योंकि यह मुद्दा सागर परिक्रमा के दौरान उनके संज्ञान में आया।
डा. अभिलक्ष लिखि ने वीडियो कन्फ्रेंस के माध्यम से समारोह को संबोधित किया और बताया कि इस यात्रा के दौरान 44 दिन में 7,989 किलोमीटर तटीय दूरी तय की गई और करीब 3,071 मछुआरा गांवों से होकर यह यात्रा गुजरी जिससे कि मछुआरों से जुड़े मुद्दों और उनकी चुनौतियों के बारे में समझा जा सके। डा. अभिलक्ष लिखि ने बताया कि इस दौरान करीब 1,000 ज्ञापन प्राप्त हुये जिनपर विभाग उचित कार्रवाई कर रहा है।
नीतू कुमारी प्रसाद ने अपने संबोधन में सागर परिक्रमा और उसके महत्व को लेकर संक्षेप में अपनी बात रखी।
यह एक महत्वकांक्षी पहल थी जिसका उद्देश्य सागर परिक्रमा यात्रा वृतांत को संपूर्णता के साथ दर्ज करना है। पुस्तक का उद्देश्य सागर परिक्रमा यात्रा के विविध तत्वों पर आधारित सामग्री, जैसे कि समुद्री मार्ग, सांस्कृतिक और भौगोलिक खोज और सागर परिक्रमा यात्रा के सभी 12 चरणों के उल्लेखनीय प्रभावों का पूरा वृतांत इसमें शामिल करना है।
सागर परिक्रमा यात्रा भारत की समृद्ध समुद्री विरासत का प्रमाण है जो कि समुद्र के साथ देश के अटूट संबंधों को दर्शाती है। यह पुस्तक इस महान यात्रा, जिसमें समुद्री मार्गो, यात्रा के दौरान हासिल सांस्कृतिक और भौगोलिक जानकारी और सागर परिक्रमा के सभी 12 चरणों के दौरान देखे गये उल्लेखनीय प्रभावों के बारे में अंतरदृष्टि प्रदान करती है।
मत्स्य पालन क्षेत्र को एक उभरते क्षेत्र के तौर पर माना जाता है। इसमें समाज के कमजोर वर्ग का आर्थिक सशक्तिकरण कर न्यायसंगत और समावेशी वृद्धि लाने की अपार संभावनायें हैं। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक, दूसरा सबसे बड़ी एक्वाकल्चर उत्पादक, सबसे बड़ा झींगा उत्पादक और चैथा सबसे बड़ा समुद्री खाद्य उत्पादों का निर्यातक है। सागर परिक्रमा यात्रा के पीछे उद्देश्य मछुआरों, तटीय समुदायों और क्षेत्र से जुड़े तमाम हितधारकों के साथ सीधे बातचीत कर भारत सरकार द्वारा मछली पालन क्षेत्र के लिये चलाये जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं के बारे में जानकारी प्रसारित करना था। इसके साथ ही मछुआरा समुदायों के समक्ष आने वाले मुद्दों चुनौतियों को समझना भी इस यात्रा का उद्देश्य था।
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