कलकत्ता उच्च न्यायालय पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हिंसक घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग संबंधी कई याचिकाओं पर आज फैसला सुनाएगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता में पांच न्यायाधीशों की पीठ इस बारे में फैसला सुनाएगी। इससे पहले उच्च न्यायालय ने चुनाव के बाद हिंसा के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों की जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से कराने का आदेश दिया था। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में ममता बनर्जी सरकार पर दोषारोपण किया था और दुष्कर्म तथा हत्या जैसे गंभीर आरोपों की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी। आयोग ने यह भी कहा था कि इससे संबंधित मुकदमें राज्य से बाहर चलने चाहिए। मानवाधिकार आयोग समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि अन्य मामलों की जांच अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल द्वारा किया जाना चाहिए और फैसले के लिए त्वरित अदालतों का गठन, विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति और साक्ष्य सुरक्षा कार्यक्रम बनाने चाहिए।
इस मामले की सुनवाई तीन अगस्त को पूरी हो गयी थी और पीठ ने आदेश सुरक्षित कर लिया था। जनहित याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि पश्चिम बंगाल में चुनावी बाद हिंसा में लोगों पर हमला किया गया, घरों से भागने पर मजबूर किया गया तथा उनकी संपत्ति नष्ट कर दी गई।
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