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पर्यावरण मंत्रालय कोई बाधा नहीं बल्कि एक संबल है, सतत विकास एवं वृद्धि के लिए एक समाधान है: भूपेन्‍द्र यादव

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्‍द्र यादव ने आज कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का ध्यान देश के वन क्षेत्र में न केवल मात्रात्मक बल्कि गुणात्मक रूप वृद्धि करने पर है जो कहीं अधिक महत्‍वपूर्ण है।

भूपेन्‍द्र यादव भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव कुमार चड्ढा की पुस्तक ‘जम्बोज ऑन द एज: द फ्यूचर ऑफ एलीफेंट कंजर्वेशन इन इंडिया’ के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। संजीव चड्ढा वर्तमान में नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नेफेड) के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री धर्मेन्‍द्र प्रधान भी मौजूद थे।

भूपेन्‍द्र यादव ने मानव व हाथी के बीच संघर्ष और हाथी की मौजूदगी वाले राज्यों में प्रोजेक्‍ट एलिफेंट प्रभाग द्वारा किए गए उपायों के बारे में बताते हुए जोर देकर कहा कि जीवन के लिए आजीविका सुनिश्चित करते हुए देश में वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के प्रबंधन एवं संरक्षण में लोगों की जागरूकता एवं भागीदारी काफी महत्वपूर्ण है।

सतत विकास एवं वृद्धि के लिए एक संबल के तौर पर पर्यावरण मंत्रालय द्वारा निभाई गई भूमिका के बारे में विस्‍तार से बताते हुए भूपेन्‍द्र यादव ने कहा, ‘पर्यावरण मंत्रालय कोई बाधा नहीं, बल्कि एक संबल है।’ उन्‍होंने लेखक को बधाई दी जिन्होंने जीवन भर पूरे भारत के जंगलों काम किया और उससे मिली सीख एवं शोध को एक पुस्‍तक के रूप में पेश किया है।

शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री धर्मेन्‍द्र प्रधान ने अपने मूल राज्य ओडिशा से मानव व हाथियों के बीच संघर्ष की घटनाओं को याद करते हुए कहा कि इस पुस्तक में मामलों के अध्‍ययन के बाद दिए गए सुझावों से सभी हितधारकों को अपने मौजूदा और भविष्य की योजनाओं को कहीं अधिक समग्र दृष्टिकोण के साथ के कार्यान्वित करने में मदद मिलेगी।

भारतीय हाथी (एलिफास्‍मैक्सिमस) एक प्रमुख प्रजाति है और वह पारिस्थितिक तंत्र का एक अभिन्न हिस्‍सा है जो वन पारिस्थितिकी तंत्र एवं जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे भारत के राष्ट्रीय विरासत पशु के रूप में मान्यता दी गई है और इसे भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (1972) के तहत सर्वोच्‍च स्तर की सुरक्षा प्रदान की गई है। भारत में 30,000 जंगली और लगभग 3,600 निजी हाथियों के साथ एशियाई हाथियों की सबसे बड़ी आबादी है।

भारत में हाथी की मौजूदगी वाले राज्यों में मानव व हाथी के बीच संघर्ष उसके संरक्षण के लिए चिंता का एक प्रमुख विषय है। हाल के दिनों में हाथी के प्रबंधन एवं संरक्षण के लिए यह एक सबसे चुनौतीपूर्ण समस्या के तौर पर सामने आया है। मानव-हाथी संघर्ष (एचईसी) का तात्‍पर्य लोगों और हाथियों के बीच नकारात्मक मुलाकात से है। इससे लोगों या उनके संसाधनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है जैसे लोगों की मौत हो सकती है अथवा उन्‍हें चोट लग सकता है और फसल एवं संपत्ति का नुकसान हो सकता है। इसके अलावा इससे लोगों को भावनात्मक तौर पर ठेस पहुंच सकती है।

मंत्रालय ने इन समस्‍याओं के समाधान के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें से प्रमुख कदम इस प्रकार हैं:

मंत्रालय देश में वन्यजीवों और उनके आवासों के प्रबंधन के लिए केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना ‘प्रोजेक्‍ट एलिफेंट’ के तहत राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
सभी राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया है कि वे राष्ट्रीय बोर्ड की स्थायी समिति के विचार के लिए मार्गदर्शन दस्तावेज के अनुसार वन्‍यजीव पर ‘रैखिक बुनियादी ढांचे के प्रभावों को कम करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल उपाय’ के तहत पशुओं की आवाजाही के लिए एक रास्‍ते की योजना तैयार करें।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के संशोधित दिशानिर्देशों के तहत राज्यों को जंगली जानवरों के हमले के कारण फसल को हुए नुकसान के लिए अतिरिक्त कवरेज प्रदान करने पर विचार करने का विकल्प दिया गया है।
सीमा पार क्षेत्रों में मानव व हाथियों के बीच संघर्ष को कम करने के लिए भारत सरकार ने बांग्लादेश के साथ बातचीत शुरू की है। इसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश गणराज्य और भारत गणराज्य के बीच सीमा पार हाथी संरक्षण पर प्रोटोकॉल तैयार किया गया है। इस प्रोटोकॉल पर 17 दिसंबर 2020 को भारत-बांग्लादेश वर्चुअल शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर किए गए ताकि भारत और बांग्लादेश के बीच हाथियों की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित हो सके।
मानव वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को 6 फरवरी 2021 को एक एडवाइजरी जारी की गई थी।
2017 में मानव हाथी संघर्ष को कम करने के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए गए थे। हाथी की मौजूदगी वाले सभी राज्यों को मंत्रालय द्वारा 6.10.2017 को मानव हाथी संघर्ष के प्रबंधन के लिए दिशानिर्देशों को लागू करने का निर्देश दिया गया था।
मानव पशु संघर्ष के कारण जानमाल के नुकसान के लिए अनुग्रह मुआवजा राशि को 2 लाख से रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है।
मंत्रालय द्वारा गठित एलिफेंट टास्क फोर्स ने देश में 32 एलिफेंट रिजर्व का सुझाव दिया जिसमें से 30 एलिफेंट रिजर्व की घोषणा पहले ही की जा चुकी है।
मंत्रालय हाथियों के लिए कहीं अधिक बचाव एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के लिए राज्य सरकारों की मदद कर रहा है।
एंथ्रेक्स/एंथ्रेक्स के संदिग्ध मामलों के कारण निजी एवं जंगली हाथियों की मौत से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की गई है।
मंत्रालय देश में मानव व हाथियों के बीच संघर्ष को कम करने के लिए विद्युत मंत्रालय, सड़क एवं परिवहन मंत्रालय, रेल मंत्रालय और कृषि मंत्रालय जैसे संबंधित मंत्रालयों एवं विभागों के साथ काम कर रहा है।

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