प्रोटीन की जलयोजन (हाइड्रेशन) गतिकी (डाईनैमिक्स) कई प्रोटीनों के एकत्रीकरण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जो विभिन्न तंत्रिका – अपक्षयी रोगों (न्यूरो – डीजेनेरेटिव डिजीजेज) के बढने की दिशा में एक प्रारंभिक कदम है। इस प्रकार एकत्रीकरण की प्रक्रिया को जल नेटवर्क की गतिशीलता में हुए परिवर्तन का पता लगाकर उन निष्क्रिय पदार्थों का उपयोग करके संशोधित किया जा सकता है जो एक औषधि या अन्य सक्रिय पदार्थ के लिए वाहन या माध्यम के रूप में काम करते हैं।
आणविक स्तर पर दुर्बल बनाने वाले न्यूरो – डीजेनेरेटिव रोगों को समझना उनके लिए उपचार या समाधान खोजने के लिए महत्वपूर्ण है। द्रवीय तरल चरण पृथक्करण (‘लिक्विड लिक्विड फेज सेपरेशन’ – एलएलपीएस) नामक एक प्रक्रिया पी. बॉडीज, केंद्रिका (न्यूक्लियोलस) जैसे कोशिकीय अन्गकों (सेल ऑर्गेनेल) की रचना को रेखांकित करती है जो कोशिकाओं के साइटोप्लाज्म में झिल्ली (मेम्ब्रेन) रहित अवयव होते हैं। ऐसे में एलएलपीएस की एक स्व – एकत्रित प्रणाली , स्थिर प्रोटीन समुच्चय (एग्रीगेट्स) के निर्माण के दौरान एक मध्यवर्ती चरण है। जब बहुसंयोजी प्रोटीन परस्पर क्रिया करते हैं तो वे प्रोटीन की सांद्रता (कंसंट्रेशन) में वृद्धि के साथ छोटे संकुलों से बड़े बहुलकीय (पोलिमेरिक) संयोजनों में तेजी से हो रहे परिवर्तन से गुजरते हैं। यह सघन चरण अक्सर तरल बूंदों जैसा दिखता है जो आसपास के माध्यम की तुलना में उच्च प्रोटीन घनत्व और कमजोर आणविक गति प्रदर्शित करता है। द्रवीय तरल चरण हस्तांतरण के माध्यम से शुरू हुई यह प्रक्रिया मानव शरीर में विशेष रूप से उम्र से संबंधित तंत्रिका -अपक्षयी रोगों (न्यूरो-डीजेनेरेटिव डिजीजेज) जैसे अल्जाइमर रोग, पार्किंसंस रोग और मोतियाबिंद (कैटेरेक्ट) को और बढ़ने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए, आणविक स्तर पर चरण पृथक्करण की प्रक्रिया को समझना आणविक जीव विज्ञान बिरादरी में अनुसंधान का एक उभरता हुआ क्षेत्र बन गया है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान एस.एन. बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज के वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि कैसे एलएलपीएस के प्रारम्भ होते ही पर प्रोटीन का जलयोजन (हाइड्रेशन) बदल जाता है। शोधकर्ताओं ने द्रवीय तरल चरण पृथक्करण प्रक्रिया के दौरान पानी की महत्वपूर्ण भूमिका को देखा है जो न्यूरो-अपक्षयी रोगों के लिए उत्तरदायी है। उन्होंने पाया कि कुछ एक्सीसिएंट्स या निष्क्रिय पदार्थ जो किसी भी औषधि अथवा सुक्रोज जैसे अन्य सक्रिय पदार्थ के लिए वाहन या माध्यम के रूप में कार्य करते हैं इस एलएलपीएस को स्थिर (स्टेबिलाइज) कर सकते हैं जबकि कुछ इसे बाधित कर सकते हैं। इस प्रकार इन एक्सीसिएंट्स का उपयोग करके जल नेटवर्क की गतिशीलता को बदलकर इन रोगों के बढ़ने की एकत्रीकरण प्रक्रिया में संशोधन किया जा सकता है।
जे. फिज. केम. लेट्ट में प्रकाशित एक शोधपत्र में प्रो. राजीव कुमार मित्रा के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने चार निष्क्रिय अंशों – आर्जिनिन, ग्लूकोज, यूबिकिटिन और गौवंशीय (बोवाइन) सीरम एल्ब्यूमिन की जांच की। सुक्रोज जैसे कुछ अंश एलएलपीएस प्रक्रिया को स्थिर करते हुए देखे गए, जबकि बोवाइन सीरम एल्बुमेन (बीएसए) इस प्रक्रिया को बाधित करते हुए देखे गए।
उनके प्रयोगों से पता चला है कि द्रवीय तरल चरण पृथक्करण (‘लिक्विड लिक्विड फेज सेपरेशन’ – एलएलपीएस) प्रक्रिया को विनियमित करने में प्रोटीन और एक्सीसिएंट हाइड्रेशन दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। इसलिए जलयोजन में बदलाव की निगरानी किया जाना ही एलएलपीएस की शुरुआत का शीघ्र और आसानी से पता लगाने के लिए एक संभावित मार्कर के रूप में कार्य कर सकता है।
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