दुबई में चल रहे जलवायु सम्मेलन कॉप-28 में कोयले के उपयोग को लेकर विकासशील और अन्य देशों के बीच मतभेद बढ़ गए है। अमीर देशों ने कोयले का इस्तेमाल नहीं करने का वायदा किया है लेकिन अन्य जीवाश्म ईंधनों को छोड़ने के मामले में कुछ नहीं कहा। कोयले के उपयोग को समाप्त करने और जलवायु के लिए वित्त उपलब्ध कराने के विवादित मुद्दों पर वार्ताकारों में चर्चा जारी है। समझौते के अंतिम प्रारूप को लेकर अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है।
कॉप-28 30 नवंबर को शुरू हुआ था और इसी दिन से लाभ हानि कोष ने कामकाज शुरू किया। यह कोष जलवायु संबंधी आपदाओं से प्रभावित होने वाले देशों की सहायता के लिए बनाया गया है। अमरीका और यूरोपीय संघ के वार्ताकारों ने कहा कि वे जीवाश्म ईंधनों के अंधाधुंध इस्तेमाल पर अंकुश के लिए तैयार है। विकासशील देशों ने विकसित देशों से कहा है कि वैश्विक जलवायु प्रणाली में बदलाव की सबसे बड़ी जिम्मेवारी उन्हीं की है। कॉप-28 सम्मेलन 12 दिसंबर तक चलेगा और उम्मीद है कि इस दिन तक वार्ताकारों के बीच कोई समझौता हो जाएगा।
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