तीन दिवसीय सेमीकॉनइंडिया 2023 सम्मेलन के अंतिम दिन उद्योग, स्टार्ट-अप, शिक्षा जगत और सरकार सहित विविध प्रतिभागियों ने भाग लिया। व्यावहारिक सत्रों और सार्थक वार्ताओं में सेमीकंडक्टर विनिर्माण से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं और एक मजबूत, लचीला तथा स्थायी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का विकास सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के महत्व को दर्शाया गया है।
भारत “वसुधैव कुटुंबकम” या “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” यानी सभी के लिए समान विकास और साझा भविष्य में मजबूती से विश्वास करता है। इसे ध्यान में रखते हुए एनएससीएस के सदस्य अंशुमन त्रिपाठी के नेतृत्व में “विश्वसनीय और लचीली सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग” विषय पर एक समर्पित पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। इस चर्चा के पैनलिस्ट माइक हैंकी, महावाणिज्यदूत, अमेरिकी दूतावास; क्योको होकुगो, अर्थव्यवस्था और विकास मंत्री, जापान; जॉर्जीना रोज़ मैके, ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग की प्रथम सचिव और जॉर्जिया टेक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अरिजीत रायचौधरी ने सेमीकंडक्टर उद्योग की प्रगति में वैश्विक साझेदारी की संभावनाओं का पता लगाते हुए, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, अनुसंधान, प्रतिभा आदान-प्रदान, स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और महत्वपूर्ण खनिज अन्वेषण में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने में भारत की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया।
उभरती हुई प्रौद्योगिकियों में अवसरों और चुनौतियों पर आयोजित पैनल चर्चा में प्रमुख विशेषज्ञ शामिल रहे, जिनमें संतोष कुमार, टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स; जया जगदीश, एएमडी; हितेश गर्ग, एनएक्सपी सेमीकंडक्टर्स और प्रोफेसर उदयन गांगुली, आईआईटी बॉम्बे प्रमुख हैं। यह चर्चा सेमीकंडक्टर में प्रमुख नवाचारों, ऑटोमोटिव सेमीकंडक्टर के भविष्य, सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने में शिक्षा जगत की भूमिका और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में स्थिरता पर केन्द्रित रही।
एचएसबीसी इंडिया के एमडी अमिताभ मल्होत्रा और मॉर्गन स्टेनली के एमडी रिधम देसाई के साथ “कैटालाइजिंग न्यू इंडियाज टेकेड” विषय पर आयोजित एक आकर्षक चर्चा में भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिटम स्थापित करने की रोमांचक संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए इस बात पर जोर दिया कि देश की खपत और उत्पादन पूरा करने की क्षमता उसे बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए एक आकर्षक देश बनाती है। सेमीकंडक्टर उद्योग की प्रगति के लिए पूंजी तक पहुंच होना महत्वपूर्ण माना गया है और बाहरी वाणिज्यिक उधार और इक्विटी निवेश सहित विभिन्न वित्तीय विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए तत्पर मूल्यांकन पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। पंकज मोहिन्द्रू आईसीईए के अध्यक्ष ने इलेक्ट्रॉनिक्स जीवीसी में भारत की बढ़ती हुई उपस्थिति के बारे में आयोजित सत्र का संचालन किया। इस सत्र के पैनलिस्ट्स में सुधीर पिल्लई, एमडी, कॉर्निंग इंडिया; अमन गुप्ता, सीएमओ और सह-संस्थापक, बीओएटी; रमिंदर सिंह, अध्यक्ष, रेडियंट; नंदिनी टंडन, वेंचर कैपिटलिस्ट और डॉ. रवि भटकल, एलिमेंट सॉल्यूशंस ने इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की उल्लेखनीय प्रगति और क्षमता के बारे में चर्चा की। इंडियन चैंपियन, बीओएटी ने एक घरेलू ब्रांड बनने और आयात से एक घरेलू विनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की अपनी यात्रा को साझा किया। इसके साथ-साथ चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम सहित सरकारी नीतियों और योजनाओं के समर्थन का भी उल्लेख किया। कॉर्निंग इंडिया ने एक ‘नारे’ से ‘मेक इन इंडिया’ में ‘विश्वास’ करने के बदलाव पर जोर देते हुए एक मजबूत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकोसिस्टम बनाने के लिए एक विनिर्माण रणनीति तैयार करने का आह्वान किया गया। व्यापक विनिर्माण रणनीतियों, समान श्रम संहिता और बीमा कवर की आवश्यकता सहित इस क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों के बारे में भी चर्चा की गई।
आईईएसए के अध्यक्ष संजय गुप्ता के नेतृत्व में अन्य सम्मानित पैनलिस्ट, अक्षय त्रिपाठी, उत्तर प्रदेश सरकार; विजय नेहरा, गुजरात सरकार; डॉ.ई.वी. रमण रेड्डी, कर्नाटक सरकार; तेलंगाना सरकार और तमिल नाडु सरकार के प्रतिनिधि ने निवेश आकर्षित करने, बुनियादी ढांचे के विकास तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योगों में, प्रतिभा का पोषण करने में विभिन्न राज्यों की तैयारियों का उल्लेख किया जो इस क्षेत्र में भारत की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पैनेलिस्टों ने सेमीकंडक्टर कंपनियों के लिए वित्तीय और गैर-वित्तीय सहायता के महत्व, फैबलेस उद्यमिता की आवश्यकता और स्टार्टअप की सहायता के लिए राज्य निधि सृजन करने के बारे में भी विचार-विमर्श किया।
“ग्लोबल सेमीकंडक्टर टैलेंट कैपिटल” विषय पर आयोजित विचार-विमर्श में भारत को सेमीकंडक्टर प्रतिभा वाला राष्ट्र बनाने के लिए सेमीकॉन इंडिया फ्यूचर स्किल्स टैलेंट रोडमैप के कार्यान्वयन का पता लगाया गया। जया जगदीश, एएमडी इंडिया; प्रोफेसर टी जी सीताराम, अध्यक्ष, एआईसीटीई; बिनोद नायर, ग्लोबलफाउंड्रीज़; श्रीनिवास सत्या, एप्लाइड मैटेरियल्स; रंगेश राघवन, लैम रिसर्च; प्रोफेसर उदयन गांगुली, आईआईटी बॉम्बे और पर्ड्यू विश्वविद्यालय के डॉ. विजय रघुनाथन ने रणनीतिक योजना, सहयोग और कार्यबल निवेश के माध्यम से सेमीकंडक्टर प्रतिभा राष्ट्र बनाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाया है।
डीपीआईआईटी के सचिव राजेश कुमार सिंह ने विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी अनुपालन और नियामक ढांचा बनाने पर आयोजित एक सत्र का संचालन किया। उन्होंने राज्यों के स्तर पर ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस परिवर्तनों पर ध्यान देने के साथ व्यापार में सरलता और एफडीआई प्रक्रियाओं में तेजी से हो रहे परिवर्तनों के बारे में प्रकाश डाला। एमईआईटीवाई के सचिव अल्केश कुमार शर्मा ने निवेशकों के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया में वैश्विक निवेशकों की सहायता, कर सुधार, संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण और नीति स्थिरता के महत्व पर जोर दिया। प्रज्ञा सहाय सक्सेना, सदस्य, सीबीडीटी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार उद्योग परामर्श और आवश्यकताओं के आधार पर संरचनात्मक परिवर्तनों को लागू करने में किस प्रकार सक्रिय रही है। सीबीआईसी के सदस्य राजीव तलवार ने कॉन्टेक्ट लैस, पेपर लैस और फेसलेस सीमा शुल्क प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में सुव्यवस्थित परिचालन करने पर जोर दिया। गुरशरण सिंह, एसवीपी, माइक्रोन ने अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौतों के बारे में सरकार के तेज़ दृष्टिकोण की सराहना की। लावा के एमडी, हरि ओम राय ने उद्योग के इस दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला कि भारत 2033 तक वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स के 50 प्रतिशत का विनिर्माण करेगा।
जया जगदीश, एएमडी इंडिया ने सेमीकॉनइंडिया 2023 में समापन भाषण दिया। सेमीकंडक्टर उद्योग में सेमीकॉनइंडिया के दूसरे संस्करण ने एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखा गया, जिसमें प्रश्न “भारत में निवेश क्यों करें” से “भारत में निवेश क्यों न करें” का उल्लेखनीय बदलाव देखा गया है, जैसा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भी कहा गया है। उन्होंने कहा कि बढ़ती हुई चिप मांग को पूरा करने के लिए चिपलेट आर्किटेक्चर और सामग्री विज्ञान जैसी उभरती हुई प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करना बहुत महत्वपूर्ण है। कुशल प्रतिभाओं के लिए सरकार की पहल और स्टार्टअप तथा अनुसंधान एवं विकास के लिए सहायता से इस क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
सेमीकॉनइंडिया के दूसरे संस्करण ने नेतृत्व और शिक्षा जगत के उच्चतम स्तर पर वैश्विक कंपनियों को सम्मिलित करके भारत को सामान्य रूप से प्रौद्योगिकी के भविष्य और विशेष रूप से सेमीकंडक्टर्स के भविष्य पर आयोजित विचार-विमर्श के केन्द्र में रखा है। यह भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा की औपचारिक शुरूआत का प्रतीक है, जिसमें भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाने की कल्पना की गई है।
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