तमिलनाडु सरकार के मंत्री वी. सेंथिल बालाजी ने राज्य मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया है। धन-शोधन और नौकरी घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से गिरफ्तारी और फिर जेल भेजे जाने के सात महीने बाद उन्होंने त्यागपत्र दिया है। तमिलनाडु की एम. के. स्टालिन सरकार में उन्हें बिना किसी विभाग के मंत्री बनाये रखा गया था, लेकिन विभिन्न न्यायालयों से बार-बार जमानत याचिका ठुकराए जाने के बाद सरकार में उनका बने रहना उचित नहीं था।
मुख्यमंत्री स्टालिन के कार्यालय ने बालाजी के त्यागपत्र की पुष्टि की है और कहा है कि उसे स्वीकृति के लिए राज्यपाल के पास भेजा गया है। कुछ ही दिनों बाद मद्रास उच्च न्यायालय उनकी जमानत याचिका पर विचार करने वाला है। बालाजी की गिरफ्तारी 2011 से 2015 के बीच परिवहन मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान हुए नौकरी के लिए रिश्वत के कथित घोटाले से जुड़ी हुई है।
गिरफ्तारी से पहले डी. एम. के. नेता बालाजी कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। उन्होंने बिजली और उत्पाद सहित कई महत्वपूर्ण विभाग संभाले। कानूनी संकट के बावजूद मुख्यमंत्री स्टालिन ने उन्हें किसी विभाग के बगैर मंत्री बनाए रखा और उनके विभाग अन्य वरिष्ठ मंत्रियों को आवंटित कर दिए थे।
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