केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत जलवायु संबंधी मसलों का समाधान तलाशने में विश्व की अगुवाई कर रहा है। डॉ. जितेंद्र सिंह आज नोएडा में भारत के शीर्ष और विश्व के सबसे उन्नत संस्थानों में से एक राष्ट्रीय मध्यम श्रेणी मौसम पूर्वानुममान केंद्र (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ) का दौरा कर रहे थे।
डॉक्टर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हर एक वैश्विक मंच पर जलवायु परिवर्तन के मुद्दे को लेकर समय-समय पर भारत की आवाज बुलंद की है। उन्होंने कहा कि भारत के विस्तृत क्षेत्र, उसकी विविधता, विषम जातियता तथा इसके आपदा प्रबंधन क्षेत्र में नेतृत्व की स्थिति के चलते विश्व जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों के संबंध में भारत की ओर देख रहा है।
डॉक्टर जितेन्द्र सिंह ने कहा कि अगले 25 वर्षों में, जब भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी का उत्सव मनाएगा और अनुसंधान, विकास तथा नवाचार क्षमताओं में अपने वैज्ञानिक कौशल को श्रेय देगा, तब विश्व को भारत की शीर्ष स्थिति को स्वीकार करना होगा।
डॉक्टर जितेन्द्र सिंह ने कहा देश इस समय ज्ञान के महती प्रसार के दौर से गुजर रहा है जबकि भारतीय युवा वैज्ञानिक नवाचार के नए आयाम तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में वैज्ञानिक प्रगति की रफ्तार हैरान कर देने वाली है और उसके परिणाम विश्व देख रहा है।
डॉक्टर जितेन्द्र सिंह ने कहा कि मौसम पूर्वानुमान के क्षेत्र में भारत न सिर्फ अग्रिम पंक्ति में है बल्कि विश्व में सर्वश्रेष्ठ स्थान पर है वह अपनी विशाल और विविधतापूर्ण जनसंख्या की जरूरत को पूरा कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के पास श्री नरेन्द्र मोदी जैसे प्रधानमंत्री हैं जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी को उच्च वरीयता देते हैं और भारतीय वैज्ञानिकों को श्रेष्ठ सफलता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनका मानना है कि भारतीय युवा के पास योग्याता के साथ ही वैज्ञानिक सोच भी है और भारत सरकार भी उन्हें व्यापक पहुंच प्रदान कर प्रोत्साहित कर रही है।
डॉक्टर जितेन्द्र सिंह ने आज एनसीएमआरडबल्यूएफ परिसर का दौरा किया और उन्हें एनसीएमआरडबल्यूएफ के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष के. मित्रा ने वहां उपलब्ध सुविधाओं, कामकाज और विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। मंत्री जी को अत्याधुनिक कंप्यूटर सुविधाओं और भारत के प्रथम सुपर कंप्यूटर सीआरएवाई एक्स-एमपी के बारे में जानकारी दी गई। यह सुपर कंप्यूटर 1988 में एनसीएमआरडबल्यूएफ परिसर में स्थापित किया गया था और 1999 तक काम कर रहा था।
इस अवसर पर पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉक्टर एम. रवि चंद्रन तथा मंत्रालय और एनसीएमआरडबल्यूएफ के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
एनसीएमआरडब्ल्यूएफ संख्यात्मक मॉडलिंग और डेटा एसिमिलेशन में एक उत्कृष्टता केंद्र है और दुनिया के ऐसे 11-12 केंद्रों में से एक है जो डेटा एसिमिलेशन करते हैं। यह केंद्र राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (एनकेएन) के शीर्ष उपयोगकर्ताओं में से एक भी है।
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