भारत आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है और आदि महोत्सव ने दिल्लीवासियों के अनेक दिल जीते हैं, यह उस भीड़ से स्पष्ट था जो 16 नवंबर 2021 से राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव में उमड़ रही है। प्रतिदिन आगंतुकों की संख्या 10,000 से अधिक और 20,000 तक पहुंचने का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। मौसम में थोड़ी ठंडक आने के साथ ही,दिल्लीवासी बड़ी संख्या में इस ओपन-एयर फेस्टिवल में पहुंच रहे हैं और यहां प्रदर्शित किये गए अद्भुत उत्पादों को देख रहे हैं तथा आदिवासी खाद्य उत्पादों का स्वाद चख रहे हैं।
रविवार 21 नवंबर 2021 को आदि महोत्सव में 60 लाख रुपये से अधिक की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई, जो आदि महोत्सव के किसी भी संस्करण में हुई सबसे अधिक बिक्री है।
देश भर के 200 से अधिक स्टालों और लगभग 1000 कारीगरों तथा कलाकारों ने अपनी अनूठे अनुभवों के साथ इसमें भाग लिया है और यह जनजातीय महोत्सव आदिवासियों को मुख्यधारा में लाने का एक तरीका है। देश की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प तथा सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करते हुए, यह महोत्सव आदिवासी कारीगरों को बड़े बाजारों से जोड़ता है और भारतीय जनजातियों की विविधता एवं समृद्धि पर ध्यान केंद्रित करता है।
जनजातीय जीवन के मूल लोकाचार का प्रतिनिधित्व करते हुए नई दिल्ली के दिल्ली हाट में वर्तमान में चल रहे इस पाक्षिक उत्सव में देश के 28 राज्यों के आदिवासी हस्तशिल्प, कला, चित्रकारी, कपड़े एवं आभूषणों की प्रदर्शनी-सह-बिक्री होती है और यह उनके समृद्ध जनजातीय व्यंजनों में एक रिंगसाइड दृश्य प्रस्तुत करता है।
ट्राइब्स इंडिया आदि महोत्सव के इस संस्करण के समाप्त होने में अभी चार दिन शेष हैं, यह स्पष्ट है कि इस महोत्सव ने दिल्लीवासियों के अनेक दिल जीते हैं। अभी अंतिम सप्ताहांत चल रहा है और इस महोत्सव के लिए लोगों की संख्या में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है, साथ ही लोगों के समृद्ध जनजातीय शिल्प, संस्कृति तथा व्यंजनों से भरे दिन का आनंद लेने के लिए दिल्ली हाट जाने की उम्मीद है। जनजातीय शिल्प, संस्कृति एवं व्यंजनों के स्वाद का जश्न मनाने वाले और एक पखवाड़े तक चलने वाले उत्सव में मुख्य रूप से जनजातीय कलाओं व हस्तशिल्प की विस्तृत विविधता का प्रदर्शन किया जा रहा है।
आदि महोत्सव एक मिनी-इंडिया है, जहां आदिवासी कारीगरों की उत्कृष्ट शिल्प परंपराएं – बुनकर, कुम्हार, कठपुतली और कढ़ाई करने वाले – सभी एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं। आदि महोत्सव में कलाकृतियों की एक विस्तृत श्रृंखला है- जैसे वार्ली शैली या पट्टाचित्र चित्रकारी में हो; दक्षिण से प्रसिद्ध टोडा कढ़ाई के लिए वांचो और कोन्याक जनजातियों से मनके हार के लिए डोकरा शैली में दस्तकारी के आभूषण; निकोबार द्वीप समूह के शुद्ध नारियल के तेल से लेकर पूर्वोत्तर के बहु-स्वाद वाले न्यूट्री-पेय पदार्थों तक; रंगीन कठपुतलियों और बच्चों के खिलौनों से लेकर पारंपरिक बुनाई जैसे डोंगरी शॉल, बोडो बुनाई, राजस्थान से कोटा डोरिया; बस्तर से लोहे के शिल्प से लेकर बांस के शिल्प और बेंत के फर्नीचर तक; मणिपुर की नीली मिट्टी के बर्तन और लोंगपी मिट्टी के बर्तन; इतना सबकुछ यहां उपलब्ध है और यह महोत्सव मानसिक प्रसन्नता का पर्व है।
इस महोत्सव का एक आकर्षण इसके विशेष समारोह और प्रदर्शन रहे हैं, जो कई दिनों से आयोजित किए गए हैं। इनमें खेल व्यक्तिव दिवस, रक्षा दिवस, पर्यटन और मीडिया दिवस शामिल हैं। इसके अलावा, उत्सव के एक भाग के रूप में, ग्रामीण विकास चेतना संस्थान, बाड़मेर द्वारा एक भव्य फैशन शो आयोजित करने की योजना 28 नवंबर को निर्धारित की गई है।
हथकरघा और हस्तशिल्प तथा प्राकृतिक उत्पादों की खरीदारी के अलावा, यहां आदिवासी व्यंजनों का बेहतरीन स्वाद भी चखा जा सकता है और इस महोत्सव में आदिवासी कलाकारों के प्रदर्शन का आनंद लिया जा सकता है।
आदि महोत्सव- जनजातीय शिल्प, संस्कृति और वाणिज्य की भावना का उत्सव है और नई दिल्ली के दिल्ली हाट आईएनए में 30 नवंबर 2021 तक सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक जारी रहेगा।
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