ट्राइफेड आदिवासियों की आजीविका में सुधार लाने और उनके सशक्तिकरण की दिशा में काम करने के लिए कई कार्यक्रम और पहल चला रहा है। हाल के दिनों में ट्राइफेड द्वारा कार्यान्वित वन धन कार्यक्रम इस दिशा में एक प्रमुख पहल है, जो लघु वनोपज (एमएफपी) की उपलब्धता के साथ-साथ महत्वपूर्ण वनवासी आदिवासी जनसंख्या वाले 25 राज्यों और 307 जिलों में संचालित है।
ट्राइफेड ने अपनी गतिविधियों का विस्तार करने और अधिक आदिवासियों की मदद करने के लिए 29 दिसंबर, 2021 को रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी- नेशन फर्स्ट पॉलिसी रिसर्च सेंटर (आरएमपी-एनएफपीआरसी) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, ताकि ज्ञान, विशेषज्ञता और संस्थागत ताकत का लाभ उठाने में सहयोगात्मक प्रयास किया जा सके। संयुक्त उद्यम में निम्नलिखित रणनीतिक क्षेत्र शामिल होंगे:
आदिवासी विकास और संबंधित गतिविधियों को लेकर विकास कार्यों और अनुसंधान परियोजनाओं का निष्पादन।
वन धन योजना जैसी मौजूदा और आने वाली सरकारी योजनाओं का आकलन और समीक्षा।
संयुक्त रिपोर्ट, या किसी अन्य प्रकाशन (प्रकाशनों) के रूप में अनुसंधान के निष्कर्ष का प्रकाशन।
अनुसंधान को बढ़ावा देना और प्रसारित करना, सत्र आयोजित करना और विषय के विशेषज्ञों के साथ बैठकें करना।
सम्मेलनों, संगोष्ठियों और अनुसंधान से संबंधित ऐसी अन्य गतिविधियों की संयुक्त रूप से मेजबानी करना।
सूचना का आदान-प्रदान, अनुसंधान के लिए संबंधित कार्मिकों और डेटा तक पहुंच प्रदान करना।
पारस्परिक तौर पर वांछनीय पाए जाने पर इस समझौते के बाहर अन्य समान विचारधारा वाली संस्थाओं के साथ सहयोग करना।
परियोजना से संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों, राज्य कार्यान्वयन एजेंसियों और अन्य संस्थाओं से जुड़ी जानकारी हेतु पहुंच प्रदान करना।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के माध्यम से लघु वनोपज (एमएफपी) के विपणन की प्रणाली तथा लघु वनोपज के लिए मूल्य श्रृंखला विकास योजना आदिवासी इको-सिस्टम को इस तरह प्रभावित किया है, जो अभूतपूर्व है। ट्राइफेड द्वारा देश के 21 राज्यों में राज्य सरकार की एजेंसियों के सहयोग से लागू की गई इस योजना के माध्यम से अप्रैल 2020 से सीधे तौर पर जनजातीय अर्थव्यवस्था में 3,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश किया गया है। मई 2020 में सरकार की सहायता से लघु वनोपज की कीमतों (एमएफपी) में 90 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई और एमएफपी सूची में 23 नई वस्तुओं को शामिल किया गया। जनजातीय कार्य मंत्रालय की यह एक प्रमुख योजना है, जो 2005 के वन अधिकार अधिनियम से सशक्त होती है। इसका उद्देश्य वनोपज के आदिवासी संग्रह कर्ताओं के लिए समुचित पारिश्रमिक और उचित मूल्य प्रदान करना है।
वन धन विकास योजना, एमएसपी को कुशलता से पूरा करती है और आदिवासी संग्रहकर्ताओं तथा वनवासियों एवं घर में रहने वाले आदिवासी कारीगरों के लिए रोजगार सृजन के स्रोत के रूप में उभरी है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन मूल्य वर्धित उत्पादों की बिक्री से होने वाली आय सीधे आदिवासियों को मिले।
ट्राइफेड जनजातीय सशक्तिकरण की दिशा में अपने मिशन को जारी रखने के लिए संगठनों, सरकारी तथा गैर-सरकारी एवं शैक्षिक संस्थाओं से जुड़ने के लिए प्रयासरत है। ट्राइफेड वनोपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और वन धन योजना जैसी प्रमुख योजनाओं के माध्यम से आदिवासी लोगों के लिए आय और आजीविका पैदा करने की दिशा में निरंतर कार्यरत है।
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